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नहीं मिली किताबें, फट गई ड्रेस

Tue, 20 Sep 2016 12:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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परिषदीय विद्यालय खुलते हैं और बंद हो जाते हैं। बस यही हो रहा है। पठन-पाठन के लिए शत प्रतिशत किताबों का वितरण अब तक नहीं हो सका है। कमीशनबाजी का खेल देखिए माह भर नहीं बीता और छात्रों की ड्रेस फटने लगी है। किताबों का वितरण न होने से स्कूलों में संवरने की आस लगाए नौनिहालों का भविष्य चौपट हो रहा है, लेकिन अफसर बेफिक्र हैं।
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   जिले के परिषदीय विद्यालय अभी भी ढर्रे पर नहीं आ सके हैं। कहीं किताबें नहीं हैं तो कहीं छात्रों को ड्रेस नहीं बंटा है। चायल ब्लॉक क्षेत्र में 70 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। यहां के सभी पंजीकृत छात्रों को अभी तक किताबें नहीं मिली हैं। तीन विषय की किताबों का छात्र इंतजार कर रहे हैं। छात्रों को जो ड्रेस दी गई है, उसकी गुणवत्ता पर अभिभावक सवाल उठाने लगे हैं। चरवा प्रथम के छात्रों को ड्रेस मिले अभी एक माह भी नहीं बीता और वह फटने लगी। घटिया किस्म के कपड़े का इस्तेमाल किया गया है।

पॉलीस्टर कपड़ा होने से इस ड्रेस को पहनने के बाद उमस भरी गर्मी में छात्र बेहाल हो जाते हैं। किसी छात्र के पैंट की चेन नहीं काम कर रही है किसी का हूक टूट गया है। कपड़ों से धागे निकलने लगे हैं। चायल प्राथमिक विद्यालय में 260 बच्चे हैं। 100 छात्रों को पहले ड्रेस दिया गया था, सोमवार को शेष बच्चों को ड्रेस वितरित किया गया है। जिनको पहले ड्रेस मिले थे, वह एकदम बेकार हो गए हैं। कपड़ों को दूर से देखकर बताया जा सकता है कि ये व्यवस्था कमीशनबाजी की भेंट चढ़ चुकी है।
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नाप का पेंच बता रहे जिम्मेदार
चायल ब्लॉक के परिषदीय विद्यालयों में अभी शत प्रतिशत किताबों के साथ ड्रेस का वितरण नहीं हो पाया है। रेडीमेड कपड़े वितरित किए जा रहे हैं। एबीएसए धर्म प्रसाद सोनकर ने बताया कि नाप का पेंच है। किसी छात्र को ड्रेस छोटी पड़ जा रही है तो किसी को बड़ी। इसलिए वितरण में देरी हो रही है। जल्द से जल्द छात्रों को ड्रेस व किताब वितरित कर दी जाएगी।
   
ठेकेदार बांट रहे स्कूलों में ड्रेस
परिषदीय विद्यालयों में ठेकेदार ड्रेस वितरित कर रहे हैं। प्रति छात्र ड्रेस के लिए दो सौ रुपये शासन से स्वीकृत हुए हैं। ठेकेदारी प्रथा के कारण ड्रेस वितरण में कमीशनबाजी एकदम से हावी हो गई है। ठेकेदार भी वेंडरों से ड्रेस वितरित कर रहे हैं। सबको अपना-अपना लाभ निकालना है। यही कारण है कि लाभ कमाने के चक्कर में घटिया क्वालिटी के कपड़ों को किसी तरह सिल कर छात्रों को वितरित किया जा रहा है।
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