कमजोर बूथों पर केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों के जरिए भाजपा अपनी पैठ बनाएगी। पिछले लोकसभा और हालिया विधानसभा चुनावों में आए परिणाम के मद्देनजर बीजेपी का जिले के 150 बूथों पर फोकस है। हर विधानसभा में सांसद को 20 और पूर्व विधायकों को 30 बूथ मजबूत करने का जिम्मा सौंपा गया है।
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भले ही प्रदेश में शानदार जीत दर्ज की हो, लेकिन कौशाम्बी की तीनों सीटों पर पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। नतीजतन तीनों सीटें सपा की झोली में चली गई। अब पार्टी की नजर 2024 के लोकसभा चुनाव पर है। पार्टी नेताओं ने बताया कि पिछले कुछ चुनावों में जिन बूथों पर पार्टी जीत नहीं पाई है या फिर कभी हारती और कभी जीतती रही, उन्हें कमजोर मानते हुए पार्टी ने विशेष फोकस करने की योजना बनाई है।
इन बूथों पर हार के कारणों की समीक्षा हो रही है। यह देखा जा रहा है कि प्रत्याशी और कार्यकर्ता ने इन बूथों पर क्या मेहनत की है। अब इन बूथों पर पार्टी योजनाओं के लाभार्थियों को ही कार्यकर्ता बनाएगी। जिस जाति या वर्ग के लोगों की इन बूथों पर बहुलता होगी, वहां समाज के बड़े नेताओं के कार्यक्रम लगाए जाएंगे। हर विधानसभा में तकरीबन 50 कमजोर बूथ चिन्हित किए गए हैं। इसमें सांसद को 20 और पूर्व विधायकों को 30-30 बूथों को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रत्येक विधानसभा के 50-50 कमजोर बूथों को चिन्हित कर पार्टी उन पर फोकस कर रही है। हर विधानसभा में सांसद को 20 और पूर्व विधायकों को 30-30 बूथों को जिम्मेदारी दी गई है। इन बूथों पर मेहनत करके 2024 के लोकसभा चुनाव में भी ऐतिहासिक जीत दर्ज करेंगे। अनीता त्रिपाठी-जिलाध्यक्ष, भाजपा