मंझनपुर। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए वर-वधू के विवाह से पहले उनकी बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज होगी। इसके बाद ही उन्हें सरकारी योजना का लाभ दिया जाएगा। यह व्यवस्था साल के अंत तक लागू होने की उम्मीद है।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की बेटियों की शादी के लिए सरकार मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत एक लाख रुपये प्रति जोड़ा खर्च करती है। कन्या के बैंक खाते में 51 हजार रुपये डाले जाते हैं और बाकी धनराशि उपहार और आयोजन पर खर्च की जाती है लेकिन अक्सर शिकायतें मिलती हैं कि वर या वधू के दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार कर दिए जाते हैं।
इस पर रोक लगाने के लिए शासन ने वर-वधू के आधार कार्ड के सत्यापन में लापरवाही पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए विवाह स्थल पर ही दोनों की बायोमेट्रिक उपस्थिति को आवश्यक कर दिया है। साथ ही, जहां 100 या इससे अधिक जोड़े के सामूहिक विवाह होंगे, वहां उपजिलाधिकारी की उपस्थिति भी अनिवार्य होगी।
इसके अलावा दूसरे जिले के अधिकारी पर्यवेक्षक के रूप में नामित किए जाएंगे, जो किसी भी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर सीधे निदेशालय या मंडल के उपनिदेशक समाज कल्याण को रिपोर्ट देंगे।
ये होंगी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के लिए पात्रता की शर्तें
कन्या के परिवार की सभी स्रोतों से आय दो लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। विवाह के समय कन्या की आयु 18 और वर की आयु 21 वर्ष से अधिक होना जरूरी है। विवाह के इच्छुक कन्या के अभिभावक की ओर से लड़की और लड़के का शैक्षिक योग्यता प्रमाणपत्र, आयु प्रमाणपत्र और मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड या मनरेगा जॉब कार्ड, आरक्षित वर्ग के लिए जाति प्रमाणपत्र के साथ पासपोर्ट आकार की फोटो और कन्या के बैंक पासबुक की छायाप्रति व पंजीकृत मोबाइल फोन नंबर के साथ आवेदन करना होता है।
योजना की संशोधित गाइडलाइन अभी नहीं आई है। नवंबर से शादियां होंगी। तब तक गाइडलाइन भी आ जाएगी और बायोमेट्रिक अटेंडेंस का प्रशिक्षण देकर उसी हिसाब से सॉफ्टवेयर डाउनलोड किया जाएगा। नई व्यवस्था से फर्जीवाड़े पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
-दिलीप कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी