मंझनपुर। अदालत की रोक के बाद भी शस्त्र लाइसेंस जारी करना कौशाम्बी के पूर्व जिलाधिकारी सत्येंद्र सिंह यादव को महंगा पड़ सकता है। डीएम की मनमानी गृह सचिव की समीक्षा में सामने आई है। गृह सचिव ने डीएम को नोटिस भेजकर इसका जवाब मांगा है। बताया जाता है कि रोक के बाद भी पूर्व डीएम ने 279 लोगों को शस्त्र लाइसेंस जारी किया था।
पूर्व जिलाधिकारी सत्येन्द्र सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान कौशाम्बी में एक हजार से ज्यादा लोगों को शस्त्र लाइसेंस जारी किया था। इसके बाद उच्च न्यायालय ने लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद भी पूर्व डीएम ने 279 लोगों को शस्त्र का लाइसेंस जारी कर दिया था। सप्ताहभर पहले गृहसचिव की लखनऊ में हुई समीक्षा बैठक में इसका खुलासा हुआ। बताया जाता है कि जिले में श्री यादव का कार्यकाल 16 फरवरी 2013 से 5 फरवरी 2014 तक था। वर्तमान में वह लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पद पर तैनात हैं।
बताया जाता है कि गृहसचिव ने बैठक के दौरान जिले में शस्त्र लाइसेंसधारियों की संख्या, शस्त्र लाइसेंस जारी करने के कारण, लाइसेंस जारी करने की तिथि आदि की बिंदुवार समीक्षा की थी। इस दौरान सामने आया कि कौशाम्बी में उस दौरान भी 279 लोगों को शस्त्र लाइसेंस जारी किया गया है। जब अदालत ने शस्त्र लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा रखी थी। अदालत की रोक के बाद भी लाइसेंस जारी किए जाने पर गृह सचिव सन्न रह गए। उन्होंने जिलाधिकारी को नोटिस भेजकर अदालत की रोक के बाद शस्त्र लाइसेंस जारी किए जाने का कारण पूछा है। सात दिन में इसका जवाब भी देने को कहा गया है।
साथ ही गृह सचिव ने जिलाधिकारियों को शस्त्र अधिनियम के तहत नए शासनादेशों का कड़ाई से अनुपालन किए जाने का भी निर्देश दिया है। चेताया है कि मनमानी पर कार्रवाई संभव है। मामले में प्रभारी जिलाधिकारी भोलानाथ मिश्र ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि सचिव ने कोई पत्र भेजा होगा तो डीएम के आने के बाद उसका उचित जवाब भेजा जाएगा।