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आंसुओं के बीच दफनाए गए अकीदत के फूल, अजादारों ने किया मातम

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मंझनपुर कस्बे में ताजिया लेकर जाते अकीदतमंद - फोटो : KAUSHAMBI
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दोआबा में दस मोहर्रम का आखिरी जुलूस निकाला गया। इमाम चौक पर रखे ताजिये उठाकर अकीदतमंद मर्सिया पढ़ते कर्बला पहुंचे। यहां अकीदतमंदों ने ताजिये के फूलों को दफन किया। इस दौरान अकीदतमंदों ने जमकर मातम किया।
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मोहर्रम की पहली तारीख से जिला मुख्यालय मंझनपुर, करारी, सिराथू, दारानगर, मूरतगंज, भरवारी, सैयद सरावां, नेवारी, भैलामकदूमपुर चायल, सरायअकिल, मुस्तफाबाद आदि स्थानों के अजाखानों में मजलिस ओ मातम का सिलसिला चलता रहा। दस मोहर्रम (मंगलवार) को सभी अजादार खुले मैदान में जमा होकर आमाले आशूरा करते हुए अपने इमाम द्वारा अदा की गई नमाज और दुआओं को पढ़ा। दोपहर एक बजे ताजिया उठाने का सिलसिला शुरू हुआ।
इमामबाड़ों और इमाम चौक से एक-एक कर ताजिये उठने लगे तो अजाखानों को सूना होते देख इमाम हुसैन के चाहने वाले दहाड़े मारकर रोने लगे। अलविदा, अलविदा या हुसैन अलविदा कहते हुए अजादार कर्बला की तरफ चल रहे थे। करारी में ताजिये हजरतगंज के सदर इमाम चौक, हुसैनिया शरीफाबाद, नयागंज और अंसारगंज से उठाए गए। जहां रौशन करारवी ने नौहा पढ़ा-शह बोले शकीना से बीबी न बुका करना, तुम मेरी जुदाई का शिकवा न सिवा करना।
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इसके बाद जुलूस में ऐतिहासिक मीर अनीस का मर्सिया पढ़ा गया। जावेद रिजवी, एहसान हैदर, मकसूद अब्बास, मौलाना जवादुल हैदर और जावेद अमीर ने पढ़ा-आज शब्बीर पा क्या आलमे तन्हाई है,जुल्म की चांद पा जहरा के घटा छाई है। उस तरफ लश्करे आदा में शफ आराई है, यहां बेटा न भतीजा और न कोई भाई है। जुलूस आहिस्ता आहिस्ता करीब चार बजे कर्बला पहुंचा जहां आखिरी नौहा पढ़ा गया। शब्बीर बहुत ही प्यासे थे, एक बूंद नहीं पाया पानी, थी खुश्क जुबां मुंह से निकली और सामने बहता था पानी। इस नौहे पर अजादारों ने दिल खोलकर मातम किया। मातम के बाद अजादारों ने नम आंखों से ताजिये के फूल दफन किए।
मेरे इमाम अलविदा, शाहे अनाम अलविदा
दारानगर के सैयदवाड़ा में मोहर्रम की दसवीं का जुलूस निकाला गया। मरहूम नवाब हुसैन, जग्गन, हिदायत अली, डॉ. हासिम, डॉ. नग्गन, कोतवाल व मजीद हुसैन आदि के इमाम बारगाह से ताबूत और अलम बरामद हुए। जिसमें जुलजनाह ताबूत व अलम लेकर सभी तजियादार क़र्बला की तरफ मेरे इमाम अलविदा शाहे, अनाम अलविदा कहते हुए पहुंचे।
जहां ताजियादारों ने फूल दफन किए। इसके बाद जुलूस सैयदबाड़ा से निकलकर दारानगर चौराहा पहुंचा। यहां अंजुमन असदिया के नौहाखान बाकर अली, गुलाम अब्बास, काजिम, साहबजादे, इमरान हैदर, अली अब्बास आदि ने अपने-अपने नौहे पेश किए। अंजुमन असदिया के सदर असद सगीर ने कहा कि इमाम हुसैन ने जुल्म, अन्याय, आतंकवाद के विरुद्ध आवाज उठाई थी। नतीजतन, यजीद ने उनके साथियों समेत पूरे कुनबे को शहीद कर डाला। इसके बाद जुलूस चौराहे से जंजीर का मातम करते हुए सैयदबाड़ा पंहुचा। यहां असद सगीर ने शाम ए गरीबा की मजलिस पढ़ी।

करारी कस्बे में ताजिया लेकर निकलते अकीदतमंद- फोटो : KAUSHAMBI

मंझनपुर में जंजीरी मातम करते अजादार- फोटो : KAUSHAMBI

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