कौशाम्बी ब्लॉक के बक्शी तारा गांव में खेत से मिट्टी खोदाई के दौरान जेसीबी से टकरा कर एक प्राचीन मूर्ति मिली है। मूर्ति के साथ एक पत्थर भी था। ग्रामीण पत्थर को मूर्ति का सिंघासन मान रहे हैं। इसकी सूचना जेसीबी चालक मुकेश यादव ने दी तो ग्रामीण दर्शन करने के लिए भीड़ लग गई।
बक्शी तारा गांव के परमेश्वर त्रिपाठी ने अपने खेत की मिट्टी एक भट्ठा संचालक को बेच दी है। भट्ठा संचालक उसी खेत में मंगलवार की रात जेसीबी से मिट्टी की खोदाई करा रहा था। इसी दौरान जेसीबी से टकरा कर दो पत्थर बाहर निकल आए। जेसीबी चालक ने करीब जाकर देखा और पत्थर को ट्रैक्टर चालकों से साफ करवाया तो मूर्ति नजर आई। उसने इसकी सूचना खेत मालिक परमेश्वर त्रिपाठी को दी।
सूचना मिलते ही परमेश्वर व उनके परिवार के नीरज त्रिपाठी, सुरेन्द्र त्रिपाठी सहित गांव के तमाम लोग खेत पहुंच गए। सभी ने मूर्ति को उठवाया और गांव के काली माता मंदिर में रख कर पूजा-अर्चना शुरू कर दी। सुबह होते ही मूर्ति मिलने की बात गांव वालों को भी पता चली तो दर्शन के लिए भीड़ लग गई। पत्थर की मूर्ति ढाई फिट ऊंची बताई जा रही है। यह मूर्ति किसकी है और कितनी पुरानी है, यह कोई नहीं बता पा रहा है।
एसडीएम सदर प्रखर उत्तम का कहना है कि बक्शी तारा गांव के खेत में प्राचीन मूर्ति मिलने की जानकारी नहीं है। राजस्व निरीक्षक को भेजकर मूर्ति के बारे में जानकारी कराई जाएगी।
जिस स्थान से मिली प्राचीन मूर्ति वहां थी बंजारों की बस्ती
गांव के केशव देव और शिवकरन यादव बताते हैं कि जिस स्थान से मूर्ति मिली है, वहां पर पूर्व में बंजारों की बस्ती थी। यह जानकारी उनको पूर्वजों द्वारा दी गई थी। मूर्ति में उकेरी गई कला आकृति में पैर के नीचे लंबी सींग वाले भैंसे का सिर दबा है। दाहिने हाथ में भाले से भैंसे के गर्दन में चुभाया गया दिख रहा है।