गांव की पगडंडियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंचने वाली एथलीट सुनीता देवी संघर्ष और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि मेहनत, लगन और मजबूत इरादों से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
एशियन एथलेटिक्स में कांस्य पदक जीतकर जिले और प्रदेश का नाम रोशन करने वालीसुनीता इन दिनों बंगलौर के साई स्टेडियम में आगामी प्रतियोगिताओं की तैयारी में जुटी हैं। उनका सपना ओलंपिक खेल में पदक हासिल करना है।
मंझनपुर के बरई-बंधवा गांव में एक साधारण किसान परिवार में जन्मी सुनीता वर्तमान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में स्नातक प्रथम वर्ष की छात्रा हैं। पढ़ाई के साथ-साथ वह अपने खेल कॅरिअर को भी पूरी गंभीरता के साथ आगे बढ़ा रही हैं। अप्रैल महीने में होने वाले महत्वपूर्ण टूर्नामेंट में बेहतर प्रदर्शन के लिए वह इन दिनों बंगलौर स्थित साई स्टेडियम में प्रशिक्षण ले रही हैं।
सुनीता रोज सुबह तीन घंटे और शाम को तीन घंटे स्टेडियम में कड़ी ट्रेनिंग करती हैं। इस दौरान वह लंबी दूरी की दौड़, फिटनेस और तकनीकी अभ्यास पर विशेष ध्यान दे रही हैं। फिलहाल वह पांच और 10 किलोमीटर रेस के लिए अपनी सहनशक्ति और गति को और बेहतर बनाने में जुटी हैं। सुनीता ने बताया, उनका सपना है कि एक दिन ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतकर तिरंगा लहराएं और अपने माता-पिता, गांव और जिले का नाम रोशन करें।
सुनीता की उपलब्धियां
सुनीता ने वर्ष 2019 में गुवाहाटी (असम) में आयोजित राष्ट्रीय जूनियर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 2000 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके अलावा भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय यूथ चैंपियनशिप में 3000 मीटर दौड़ में भी उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया।
वर्ष 2022 में कुवैत में आयोजित एशियन यूथ चैंपियनशिप में 3000 मीटर दौड़ में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता। इसके बाद 2024 में दुबई में आयोजित अंडर-20 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम ऊंचा किया।
प्रतिभागियों के साथ अंतरराष्ट्रीय एथलीट प्रतियोगिता में दौड़ती 335 बैच की सुनीता- फाइल फोटो: स्
प्रतिभागियों के साथ अंतरराष्ट्रीय एथलीट प्रतियोगिता में दौड़ती 335 बैच की सुनीता- फाइल फोटो: स्
प्रतिभागियों के साथ अंतरराष्ट्रीय एथलीट प्रतियोगिता में दौड़ती 335 बैच की सुनीता- फाइल फोटो: स्