नेवादा ब्लाॅक में मनरेगा योजना से संचालित कार्यों में तैनात बीडीओ पर मूरतगंज में तैनाती के दौरान दो हजार की लागत से बने शिलाफलकम का 11 हजार रुपये भुगतान का आरोप लगा है। जिन ग्राम पंचायतों ने श्रम पर मामूली कार्य किया है उनसे मोटी रकम लेकर लाखों रुपये के पक्के कार्य की स्वीकृति दी गई है। शिकायत पर ग्राम्य विकास विभाग संयुक्त आयुक्त ने सप्ताह भर के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। समय से जवाब नहीं देने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
मूरतगंज ब्लाॅक निवासी मंजीत सिंह ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन खंड विकास अधिकारी ने डेढ़ साल पहले शिलाफलकम के ग्रेनाइट पत्थरों पर अक्षरों के अंकन की जगह अक्षरों की पेस्टिंग कर स्वयं आपूर्ति की है। उन्होंने इसके लिए दो हजार रुपये की लागत वाले पत्थर पर 11 हजार रुपये का भुगतान कर दिया है।
आरोप है कि काजू ग्राम पंचायत में 12.84 लाख के कच्चे कार्य के सापेक्ष 31.63 लाख का, बेरुआ में 3.62 लाख के कच्चे कार्य के सापेक्ष 10.4 लाख, सलेम गांव में 6.1 लाख कच्चे कार्य के सापेक्ष 9.3 लाख रुपये के पक्के कार्य समेत गौहानी कला आदि ग्राम पंचायतों से मोटी रकम वसूल कर 20 लाख से 40 लाख तक के पक्के कार्यों की स्वीकृति दी गई है।
इसके अलावा राज्य वित्त योजना से ब्लाॅक परिसर में पहले से लगे खड़ंजा को उखाड़ कर उन्हीं ईंटों को फिर से बिछवा कर भुगतान कराया गया है। शिकायत पर संयुक्त आयुक्त (मनरेगा) संजय कुमार पांडेय ने मामले की जांच डीसी मनरेगा से करवा कर सप्ताह भर के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।
आरोपों का जवाब बनाया जा रहा है। तीन दिवस के भीतर मेल कर दिया जाएगा।- संजय गुप्ता, बीडीओ- नेवादा