सदर तहसील के दमद का पूरा गांव में बृहस्पतिवार शाम लगी आग में तीन साल की लाडो की दर्दनाक मौत के बाद पीड़ित परिवार की मदद के लिए फिलहाल कोई आगे नहीं आया। आग की क्रूर लपटों में बेटी खोने के साथ ही गृहस्थी गवां बैठे मजदूर सुरेश की मदद के लिए सिर्फ उसका बुजुर्ग पिता आगे आया है। सुरेश आग से झुलसे बेटे लाला व पत्नी के साथ पिता के घर में शरण लिए है। गांव के कुछ लोगों ने अनाज देकर उसकी मदद की लेकिन समाजसेवियों ने अपनी तरफ से दरियादिली नहीं दिखाई। प्रशासन की तरफ से भी कोई राहत फिलहाल नहीं मिली है।
दमद का पूरा गांव का सुरेश बृहस्पतिवार को मजदूरी करने गया था। दोपहर बाद उसकी पत्नी तीन वर्षीय बेटी लाडो को सुलाने के बाद मवेशियों के लिए चारा काटने खेत चली गई। घर में सुरेश का बड़ा बेटा लाला था। शाम करीब चार बजे संदिग्ध हाल में लगी आग ने गरीब परिवार को बेघर कर दिया। झोपड़ी के अंदर सो रही लाडो की भी आग से जलकर दर्दनाक मौत हो गई।
बिना दरवाजे की कोठरी में बसेरा
सुरेश व उसकी पत्नी और बेटे का नया आशियाना उसके बुजुर्ग पिता का झोपड़ीनुमा घर बना। गरीब पिता ने सुरेश को जिस घर में शरण दी उसमें भी छप्पर है। झोपड़ी में दरवाजा तक नहीं लगा। गांव के लोग सुरेश की हालत में तरस तो खा रहे हैं लेकिन मदद के लिए कोई आगे नहीं आ रहा। पीड़ित परिवार जमीन पर लेट कर अपनी गरीबी पर आंसू बहा रहा है।