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डीएपी के बाद अब यूरिया का संकट, किसानों में आक्रोश

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रबी की फसलों के लिए सहकारी समितियों में डीएपी के बाद अब यूरिया का संकट खड़ा हो गया है। कौशाम्बी ब्लॉक के म्योहरिया स्थित सहकारी समिति से किसानों को यूरिया खाद नहीं मिल रही है। किसान खाद के लिए दर-दर भटक रहे हैं। बाहर निर्धारित मूल्य से अधिक दाम पर प्राइवेट दुकान से खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं। इसे लेकर किसानों में आक्रोश है। क्षेत्रीय किसान सचिव पर खाद की कालाबाजारी करने का आरोप लगा रहे हैं।
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किसानों का कहना है कि लगभग 600 बोरी यूरिया आने के बाद भी उन्हें आवश्यकतानुसार यूरिया नहीं मिल पा रही है। एक आधार कार्ड में मात्र दो बोरी खाद दी जा रही।सोसाइटी में यूरिया उपलब्ध होने के बावजूद किसानों को सही समय पर खाद नहीं मिल पा रही है। खाद के लिए किसानों को तीन-तीन दिन समिति का चक्कर लगाना पड़ रहा है। म्योहर गांव के सूर्य प्रकाश, रामधनी, दातादीन आदि किसानों का कहना है कि गेहूं की फसलों की सिंचाई के बाद तुरंत खाद डालनी पड़ती है। लेकिन सही समय पर यूरिया खाद किसानों को नहीं मिल पा रही है। जिन्हें मिलती भी है तो वह आवश्यकता से बहुत कम होती है।
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