जिला अस्पताल स्थित वन स्टॉप सेंटर से भागीं किशोरियों ने मजिस्ट्रेट के सामने चौंकाने वाला बयान दिया है। बयान में उनका कहना था कि बरामदगी के बाद वह अपने परिजनों के साथ जाना चाहतीं थीं, लेकिन उन्हें जान बूझकर वन स्टॉप सेंटर में रखा गया। इस दौरान सेंटर की काउंसलर ने किसी से फोन पर उन्हें बेचने की बात कही तो वे डरकर भाग निकलीं।
तीन फरवरी को जिला अस्पताल स्थित वन स्टॉप सेंटर की दूसरी मंजिल पर खिड़की तोड़कर करारी और सदर कोतवाली इलाके की दो किशोरियां भाग निकलीं थीं। दोनों किशोरियां पिछले दिनों अपने प्रेमी के साथ भागीं थीं, जिन्हें पुलिस ने बरामद किया था।
इसके बाद किशोर न्यायालय में पेश करने के बाद उन्हें वन स्टॉप सेंटर में रखा गया। पुलिस ने दोनों किशोरियों को सरायअकिल कोतवाली के खोंपा गांव से बरामद किया। बरामदगी के बाद किशोरियों ने बताया कि वह पहले ही घर जाने के लिए बयान दे चुकीं थीं, लेकिन उन्हें जानबूझ कर वन स्टॉप सेंटर में रखा गया। मामले में जिलाधिकारी सुजीत कुमार ने उप जिलाधिकारी न्यायिक मनीष यादव को जांच सौंपी है।
जांच अधिकारी ने अब तक किशोरियों, वन स्टॉप सेंटर के कर्मियों व सुरक्षा में तैनात महिला पुलिस कर्मियों के बयान लिए हैं। बयान में किशोरियों ने चौंकाने वाली बातें बताईं। पहली यह कि उन्हें बेचने की बात कही जा रही थी और दूसरी यह कि उन्हें वहां से भगाने में वन स्टॉप सेंटर के लोगों ने ही मदद की है। यहां तक उन्हें प्रेमी के घर भेजने के लिए पैसों की मांग भी की गई।
जांच अधिकारी का कहना है कि किशोरियों को बरामद करने वाले पुलिस कर्मियों के बयान होने बाकी हैं। सीडब्लूसी के कुछ लोगों को भी बयान के लिए बुलाया जाएगा। जल्द ही जांच पूरी करके मामले की रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी।