बगिया में आम की देखरेख करते चंद्रदेव त्रिपाठी व पेड़ पर लटकते बड़े आम। स्रोत: स्वयं
कौशाम्बी ब्लॉक के बेरौचा गांव की कहानी लोगों के लिए मिसाल है। अधिवक्ता जयप्रकाश त्रिपाठी ने अपने पिता चंद्रदेव त्रिपाठी की पर्यावरण संरक्षण की सोच को आगे बढ़ाते हुए पांच बीघे में हरित बगिया विकसित की है।
जयप्रकाश बताते हैं कि करीब 15 वर्ष पहले उनके पिता चंद्रदेव त्रिपाठी ने घर के पास कुछ आम के पौधे लगाकर बागवानी की शुरुआत की थी। शुरुआत में उन्होंने दर्जनों आम के पौधों की रोपाई की और उनकी देखरेख में पूरा समय लगाया। हर वर्ष वह नए पौधे लगाते रहे और धीरे-धीरे यह शौक एक बड़े हरित अभियान में बदल गया।
जयप्रकाश बताते हैं कि पिता पर्यावरण संरक्षण को लेकर बेहद गंभीर रहे हैं। जब भी किसी दूसरे शहर या क्षेत्र में जाते थे, वहां से अलग-अलग प्रजातियों के पौधे लेकर आते थे। वर्षों की मेहनत का परिणाम है कि आज घर के आसपास स्थित लगभग पांच बीघे क्षेत्र में 30 प्रकार के आम सहित लीची, पपीता, नारियल, संतरा, मौसमी, खजूर, बेल, अखरोट समेत करीब 50 प्रकार के फलदार वृक्ष मौजूद हैं। इसके अलावा 10 प्रकार के फूलों और 20 अन्य सजावटी एवं आकर्षक पौधों ने पूरी बगिया को प्राकृतिक उद्यान का स्वरूप दे दिया है।
बगीचे में खिले रंग-बिरंगे फूल और उनकी मनमोहक खुशबू लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। सुबह और शाम आसपास के गांवों के लोग यहां पहुंचकर पेड़ों की छांव में बैठते हैं। जयप्रकाश बताते हैं कि हर वर्ष बारिश से पहले गोशाला से तैयार देसी खाद पौधों की जड़ों में डाली जाती है, जिससे पेड़ स्वस्थ और हरे-भरे बने रहते हैं।