बैग की सिलाई करतीं शिव देवी। स्रोत: स्वयं
बेटी के लिए बैग खरीदने के पैसे नहीं थे तो शिव देवी ने खुद सिलकर उसकी जरूरत पूरी की। लोगों को उनका बनाया बैग पसंद आया तो दूसरे बच्चों के लिए भी बैग सिलने लगीं। धीरे-धीरे मांग बढ़ी तो उन्होंने इसे कारोबार का रूप दे दिया।
कड़ा ब्लॉक के सैनी गांव की शिव देवी आज छह ऑटोमेटिक सिलाई मशीनों और दो दुकानों की मालकिन हैं। वह करीब दस अन्य महिलाओं को रोजगार देने के साथ बैग बनाने का हुनर भी सिखा रही हैं।
कड़ा ब्लॉक के सैनी गांव निवासी शिव देवी वर्ष 2020 में शिव शक्ति स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। वर्तमान में वह समूह की कोषाध्यक्ष हैं। समूह के माध्यम से सीसीएल ऋण मिलने पर उन्होंने बैग बनाने के कारोबार को आगे बढ़ाया।
शिव देवी को पहले से ही सिलाई-बुनाई का हुनर आता था। उन्होंने अपने बच्चों के लिए स्कूल बैग तैयार किए तो लोगों को पसंद आए। इसके बाद दूसरे बच्चों के लिए भी बैग बनाने लगीं और धीरे-धीरे ऑर्डर मिलने लगे।
परिवार का मिला साथ, बढ़ता गया कारोबार
शिव देवी ने सैनी बाजार में अपनी दुकान खोली। पति सतीश चंद और दोनों बेटों ने भी कारोबार में सहयोग किया। शुरुआत में दो ऑटोमेटिक मशीनों से काम शुरू किया। वर्तमान में मांग बढ़ने के साथ मशीनों की संख्या छह हो गई। मौजूदा समय में उनका पूरा परिवार बैग बनाने और बेचने के काम में जुटा है।
मंझनपुर में भी खोली दुकान, महिलाओं को दे रहीं रोजगार
शिव देवी को सरकार की ओर से मंझनपुर तहसील परिसर में दुकान के लिए कमरा आवंटित किया गया है। यहां उन्होंने बैग की दुकान के साथ एक कारखाना भी शुरू किया है। कारोबार से उन्हें हर महीने करीब 20 से 25 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। वह अन्य समूह की महिलाओं को रोजगार देने के साथ उन्हें बैग बनाने का प्रशिक्षण भी दे रही हैं।