मंझनपुर। यमुना तराई इलाके में निषेधाज्ञा लगाने से बालू मजदूरों में जबरदस्त आक्रोश है। सोमवार को मजदूरों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर एसडीएम के आदेश निरस्त किए जाने की मांग की। अखिल भारतीय किसान-मजदूर सभा के लोगों का आरोप है कि निषेधाज्ञा लगाकर अफसर सिर्फ मजदूरों की आवाज दबाना चाहते हैं। उनके मंसूबों को मजदूर पूरा नहीं होने देंगे और जमकर खिलाफत करेंगे। प्रशासन यदि तराई में संघर्ष रोकना चाहता है, तो मशीनों से बालू के खनन पर रोक लगाएं।
चायल और मंझनपुर के एसडीएम ने यमुना तराई इलाके में धारा 144 लागू कर दी है। आदेश से जेसीबी, पोकलैंड से बालू का खनन रोकने, असलहे लेकर चलने, सभा करने, पर्चा बांटने पांच या पांच से अधिक व्यक्तियों का घाटों पर जमा होने पर रोक लग गई है। घाटों पर निषेधाज्ञा लागू होने की जानकारी से बालू मजदूर और उनके संगठन अखिल भारतीय किसान-मजदूर सभा (एआईकेएमएस) के नेता भड़क उठे। सोमवार को संगठन के इलाहाबाद कमेटी के महासचिव राजकुमार पथिक और कौशाम्बी के महासचिव फूलचंद्र निषाद के साथ बालू मजदूरों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। इसमें निषेधाज्ञा लागू करने को मनमानी कार्रवाई बताया। मजदूर नेताओं ने इसको वापस लेने की मांग की। साथ ही नेताओं ने जिले के विभिन्न यमुना घाटों पर रात के अंधेरे में मशीनों से हो रहे बालू खनन पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग की है। मजदूरों का कहना है कि यदि मशीनों से खनन पर रोक नहीं लगाई गई, तो वे आरपार की लड़ाई लड़ने को बाध्य होंगे।