मंझनपुर। कौशाम्बी-फतेहपुर को जोड़ने वाला अजुहा-अलीपुर जीता वाया टांडा मार्ग का निर्माण करीब 30 साल से विवादों में अटका है। अफसरों की अनदेखी से मार्ग के करीब सौ मीटर हिस्से का निर्माण नहीं हो पा रहा है। इसके चलते रास्ते में पड़ने वाले स्कूलों के हजारों छात्रों को आवागमन में भारी परेशानी हो रही है। बड़े-बड़े गड्ढे और कीचड़ से गिरकर विद्यार्थी घायल हो जाते हैं। मामले की ऑनलाइन व ऑफलाइन शिकायत प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री से की गई है।
सिराथू ब्लॉक के अजुहा से अलीपुर जीता वाया टांडा मार्ग की लंबाई करीब 16 किमी है। इस सड़क पर यूपी बोर्ड के 75 फीसदी टॉपर देने वाले धर्मा देवी इंटर कॉलेज केन, जय मां दुर्गे इंटर कॉलेज अमिरतापुर समेत करीब छह स्कूल कॉलेज हैं। साथ ही तीन दर्जन से अधिक गांव बसे हैं। प्रमुख मंडी अजुहा आवागमन के लिए यह मुख्य मार्ग है। बताया जाता है कि वर्ष 1988 में इसका निर्माण श्ुारू कराया गया तो केन गांव के एक काश्तकार ने अड़ंगा लगा दिया। पैमाइश के दौरान उसने अपनी भूमि से सड़क नहीं बनाने दिया। मामला कोर्ट पहुंचा तो अदालत ने कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग को काउंटर लगाने का आदेश दिया, लेकिन विभाग ने आज तक काउंटर नहीं लगाया।
सौ मीटर छोड़कर बाकी हिस्से की सड़क कई मर्तबा बनी और ध्वस्त हुई, लेकिन विवाद नहीं हल हुआ। इधर बीच सड़क पर यातायात के दबाव को देखते हुए शासन ने इसका चौड़ीकरण कराना शुरू किया। छह महीने पहले ही 90 फीसदी निर्माण कार्य हो गया। केन गांव के पास भूमि विवाद के चलते फिर निर्माण कार्य रुक गया। टांडा के सूर्यभान भाष्कर ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के पोर्टल पर, केन गांव के ग्राम प्रधान रामेश्वर प्रसाद व रामसुभग त्रिपाठी ने एसडीएम से शिकायत कर सड़क निर्माण कराने की मांग की। आरोप लगाया कि विभागीय जिम्मेदारों के दिलचस्पी नहीं लेने से निर्माण कार्य अटका है। इसके चलते सड़क पर तमाम छोटे-बड़े गड्ढे हो गए हैं और जलभराव हो गया है। बारिश में इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों बच्चों को रोजाना दिक्कतों से जूझना पड़ता है। अक्सर विद्यार्थी कीचड़ में फंसकर गिरते रहते हैं।