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अपराजिता कार्यक्रम के तहत 'अपने शहर को जानो' मुद्दे पर कौशाम्बी में गोष्ठी

Thu, 13 Dec 2018 05:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, करारी।
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करारी। करारी कस्बा स्थित करारी इंटर कॉलेज में गुरुवार को अमर उजाला की ओर से अपराजिता कार्यक्रम के तहत अपने शहर को जानो मुद्दे पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के शोध छात्र डॉ. सुरेश नागर चौधरी ने छात्र-छात्राओं को कौशाम्बी जिले का ऐतिहासिक महत्व बताया। उन्होंने अपने शोध क्षेत्र से जुड़ी तमाम जानकारियां भी साझा कीं।
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कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानाचार्या मन्नो देवी मिश्र ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित करके की। इसके बाद विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए इतिहासकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के शोध छात्र डॉ. सुरेश नागर चौधरी ने बताया कि कौशाम्बी का इतिहास आदिकाल से ही समृद्धशाली रहा है। उन्हाेंने जिले के एक-एक ऐतिहासिक स्थल पर बारीकी से प्रकाश डाला।

शोध छात्र ने जिले के कई ऐसे ऐतिहासिक स्थलों के बारे में बताया, जिनका उल्लेख सिर्फ किताबों में मिलता है। बताया कि कौशाम्बी में देव श्रव्य कुंड था, जिसमें महात्मा बुद्ध स्नान करते थे। यह कुंड प्रभाषगिरि पर्वत के पास आज भी है, पर, इसकी किसी को जानकारी नहीं है। इस कुंड का पानी कभी नहीं सूखता है। उपेक्षा के अभाव में कुंड अब सिर्फ एक छोटा सा तालाब बनकर रह गया है। ये भी बताया कि कौशाम्बी क्षेत्र में परलेयक वन और परलेयक हाथी का स्मारक था। वन तो नहीं दिखता, पर, स्मारक को करीब चार वर्ष पूर्व आईडीयू के शोध छात्रों की टीम ने खोज निकाला था।
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उन्होंने कौशाम्बी के नामकरण पर कई मतभेद बताए। कुछ गांवों के नाम पूर्व में क्या थे और अब क्या हैं, यह स्पष्ट करते हुए बताया कि कौशाम्बी इलाके का मिर्दहन का पूरा गांव पहले मृगदावन था। इस क्षेत्र में तत्कालीन राजा महाराज उदयन मृग पलवाते थे। इसी तरह अब का महावां गांव तब महावन था, जो बड़ा ही घना जंगल था। घमसिरा गांव को धम्म किला के बारे में बताया कि यहां भी सम्राट अशोक ने एक पत्थर गड़वाया था, जिसमें कौशाम्बी स्थित अशोक स्तम्भ की तरह शासनादेश लिखा था। इसी तरह पंवारा गांव को पवरिका वन बताया, यह वन तत्कालीन सम्राट महाराजा उदयन के मंत्री रहे पवरिकाराम का था। शोध छात्र ने साफ कहा कि कौशाम्बी के इतिहास पर एक दिन में प्रकाश डाला जाना संभव नहीं है। इसके लिए काफी वक्त चाहिए।
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