कायाकल्प अवार्ड से नवाजा गया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मूरतगंज रेफर सेंटर बन गया है। एक्सरे, अल्टासाउंड मशीन व महिला डॉक्टर के अभाव में मरीजों को मुकम्मल इलाज नहीं मिल पा रहा है। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को होती है। जबकि इस अस्पताल में पड़ोसी जनपद प्रतापगढ़ तक के मरीज इलाज के लिए आते हैं।
जीटी रोड किनारे होने के कारण पीएचसी मूरतगंज की खासी अहमियत है। सिहोरी गंगा पुल होने के कारण करीब 20-25 मरीज पड़ोसी जनपद प्रतापगढ़ के भी रोजाना इलाज कराने आते हैं। इसके अलावा ज्यादातर हादसों में घायल इसी अस्पताल में शरण लेते हैं। इसके बावजूद अस्पताल में अपेक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। प्रदेश सरकार की टीम ने वर्ष 2017 में मरीजों को बेतहर स्वास्थ्य सुविधा, दवाओं के सही प्रबंधन, भवन के रख-रखाव, पेयजल, बिजली, शौचालय, सफाई, बायोवेस्ट, वार्ड, प्रसव, मरीजों की ओपीडी सहित करीब दो हजार बिन्दुओं पर सर्वे कराया था। टीम ने सौ में से इस अस्पताल को 70 अंक दिए। इसी वजह से 12 सितंबर को लखनऊ में अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. सुनील कुमार सिंह को कायाकल्प अवार्ड दिया गया। इस अस्पताल में चिकित्सा प्रभारी सहित छह डॉक्टर तैनात हैं। पर सबसे अधिक समस्या महिला डॉक्टर की है। छह महीने पहले डॉ पूनम सिंह का तबादला होने के बाद से यहां पर किसी महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई है। इस वजह से आधी आबादी को इलाज के लिए भटकना पड़ता है। सर्जन डॉक्टर के साथ ही एक्सरे व अल्ट्रासाउंड मशीनें भी नहीं हैं। जबकि दो-सवा दो सौ मरीजों की रोजाना ओपीडी होती है। इसके चलते यहां आने वाले मरीजों को मामूली उपचार के बाद फौरन जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
स्टॉफ नर्स कराती हैं प्रसव
अस्पताल में रोजाना औसतन दस महिलाओं का प्रसव कराया जाता है। महिला डॉक्टर के अभाव में इन महिलाओं के प्रसव का जिम्मा स्टॉफ नर्स पर रहता है। ऐसे में यहां प्रसव कराना जोखिमभरा रहता है। कई बार हालत बिगड़ने पर प्रसूताओं को सीधे रेफर कर दिया जाता है।
साफ-सफाई और बिजली-पानी की दुरुस्त है व्यवस्था
अस्पताल में साफ-सफाई की व्यवस्था फिलहाल ठीक है। बिजली के लिए भी जेनरेटर की व्यवस्था की गई है। मरीजों, तीमारदारों को पेयजल के लिए वॉटर कूलर लगाया गया है। कुल-मिलाकर बाहर की सुविधाएं तकरीबन दुरुस्त हैं।