जिले के 61 हजार किसानों का माफ होगा कृषि ऋण
ऋण माफी के दायरे में आने वाले किसानों सेे बैंक नहीं करेंगे तगादा
तीन माह में हैंडओवर होंगी लंबित पेयजल सभी परियोजनाएं
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
जिले के 61 हजार किसानों का कृषि ऋण जल्द माफ होगा। ऋण माफी के दायरे में आने वाले जिले के किसानों को बैंक न तगादा करेगा और न ही कोई नोटिस देगा। जिले में लंबित सभी पेयजल परियोजनाओं को तीन माह के भीतर हैंडओवर करा दिया जाएगा। यह बातें गुरुवार को पत्रकार वार्ता के दौरान जिले के प्रभारी मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कही।
जिले के प्रभारी मंत्री व प्रदेश सरकार के दुग्ध विकास, संस्कृति, धर्मार्थ कार्य, अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ बोर्ड मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी गुरुवार को जिला योजना की बैठक में शामिल हुए। बैठक के बाद उन्होंने पत्रकार वार्ता की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश व केंद्र सरकार द्वारा जनहित में संचालित की गई योजनाओं को क्रमवार रखा। उन्होंने बताया कि गम्भीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति की मदद मुख्यमंत्री कोष से की जाएगी। पीड़ित के आवेदन करने पर डीएम तीन दिन के भीतर रिपोर्ट देंगे। उन्होंने कहा कि कौशाम्बी का धार्मिक व ऐतिहासिक दृष्टि से विशेष महत्व है। इसे जल्द ही पर्यटन स्थल का दर्जा मिलेगा। मौजूदा समय में किसानों के प्रमुख मुद्दे ऋण माफी के सवाल पर उन्होंने बताया कि जिले के 61682 लघु-सीमांत किसानों का चयन कर्जमाफी के लिए गया है। योजना का लाभ गलत व्यक्ति को न मिले इसके लिए सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होते ही इन किसानों का 285 करोड़ बैंकों को भेजकर कर्ज माफ कराया जाएगा। तब तक कर्जमाफी की सीमा में आने वाले किसानों से बैंक न तो तगादा करेगा और न ही उन्हें नोटिस देगा। वार्ता के दौरान सांसद विनोद सोनकर के अलावा तीनों विधायक, डीएम मनीष कुमार वर्मा, एसपी वीके मिश्र, सीडीओ दिनेश कुमार सिंह भी मौजूद रहे।
प्रभारी मंत्री ने बताया कि जिले की प्रमुख समस्या तेजी से नीचे खिसक रहे भू-गर्भ जल स्तर की है। इस समस्या से जिले को उबारने के लिए स्प्रिंकलर सिंचाई विधि को मंजूरी दी गई है। आने वाले दिनों में जिले के चार सौ किसानों को इस सिंचाई विधा से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा जिले की ससुर खदेरी व किलनहाई नदियों में चेकडैम बनवाकर भूगर्भ जल स्तर सुधारे जाने की कोशिश की जाएगी।
प्रभारी मंत्री ने वार्ता के दौरान बताया कि अभी तक मदरसों में पढ़ने वाला कोई भी छात्र प्रशासनिक सेवा में सफल नहीं हो सका। मदरसों में ऐसी शिक्षा नहीं दी जाती कि वहां का छात्र जीवन में रोजगार हासिल कर सके। अब ऐसा नहीं होगा। मरदसों में तकनीकी व रोजगार परक शिक्षा दिए जाने के लिए प्रदेश सरकार ने ठोस कदम उठाया है। इसे तहत मदरसों की हर साल छह से दस लाख रुपए की मदद करते हुए तकनीकी व रोजगारपरक शिक्षा की व्यवस्था कराई जा रही है।
प्रभारी मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने बताया कि कौशाम्बी ही नहीं पूरे प्रदेश में अस्पताल भवन तो बन गए हैं पर स्टॉफ की तैनाती नहीं की जा सकी है। इसके चलते करोड़ो रुपए भवन में खर्च होने के बाद भी मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। सूबे की योगी सरकार इस कमी को जल्द दूर करने जा रही है। आने वाले दिनों में हजारों की संख्या में चिकित्सकों की नियुक्ति कर पदों को भरा जाएगा।