मंझनपुर। चौकिए नहीं! अब आपको अपने जान-माल की हिफाजत खुद करनी पड़ेगी, क्योंकि कौशाम्बी के थानों में दरोगा-सिपाहियों का जबरदस्त टोटा है। जिले में पुलिसफोर्स की कमी का आलम यह है कि एक-एक सिपाही के जिम्मे 6-6 हजार लोगों की सुरक्षा है। जबकि मानक 800 आबादी पर एक सिपाही की नियुक्ति का है। यही वजह है कि जिले में रोजाना लूट, चोरी, छिनैती, छेड़खानी जैसी घटनाएं हो रही है। पुलिस सिर्फ भुक्तभोगियों की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज करने तक सिमटी है।
सांख्यिकी विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो कौशाम्बी के 440 गांव और सात नगर पंचायतों में 15.96 लाख लोग रहते हैं। जिले की इस आबादी की सुरक्षा के लिए कौशाम्बी 13 कोतवाली 18 पुलिस चौकियां खोली गई हैं। पर, इन कोतवाली और चौकियों में दरोगा, सिपाहियों की कमी है। पुलिस बल की इसी कमी के कारण जिले में आपराधिक घटनाएं लगातार हो रही हैं। पुलिस विभाग के आंकड़ों को देखें तो जिले में महज 300 सिपाहियों की मौजूदगी है, जबकि जिले में कम से कम 1100 सिपाही होने चाहिए। ऐसी ही कमी मुख्य आरक्षी, दरोगा की भी है। पुलिस बल की इसी कमी के कारण जिले में रोजाना हो रही लूट, छिनैती, चोरी, हत्या, मारपीट, छेड़खानी जैसी अपराधिक घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। वहीं घटनाओं के खुलासा भी नहीं हो पा रहा है।
इतना ही नहीं लगातार हो रहे स्थानांतरण के कारण भी जिले में दिन-ब-दिन पुलिस कर्मियों की संख्या घटती जा रही है। खुद पुलिस अधीक्षक रतनकांत पांडेय कहते हैं कि जिले के कोतवाली और पुलिस चौकियों में मानक के अनुरूप पुलिस बल की तैनाती के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है। प्रयास किया जा रहा है कि जिले में मानक मुताबिक फोर्स की मौजूदगी हो।