मंझनपुर (ब्यूरो)। जिले में 10 दिनों से धूप नहीं खिलने और कोहरे के कारण से आलू की फसलों में झुलसा का प्रकोप शुरू हो गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने भी शनिवार को आलू के खेतों की जांच करके रोग फैलने की पुष्टि की। साथ ही किसानों को इस बीमारी से फसलों को बचाने का उपाय सुझाया। बताया कि मैंकोजेब रसायन के छिड़काव से फसलों को झुलसा रोग से बचाया जा सकता है।
बता दें कि जिले में 66 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती की जाती है। इधर, कौशाम्बी में 10 दिनों से धूप नहीं खिली है। दिन-रात कोहरे की धुंध छाई रहती है। मौसम के इस कहर से आलू की फसलों में रोगों का प्रकोप शुरू हो गया है। करारी के मोअज्जमपुर, अगियौना, पंडीरी आदि गांव के के किसानों की करीब 50 बीघे से भी अधिक आलू की फसल इसकी चपेट में आ चुकी है। इसी तरह से सिराथू, मूरतगंज, चायल आदि क्षेत्र में भी बोई गई आलू की फसल नम मौसम से रोग की चपेट में है।
शनिवार को कृषि विज्ञान केंद्र महगांव के पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. नवीन शर्मा ने अपनी टीम के साथ आलू की फसलों का मुआयना किया। उन्होंने बताया कि मौसम की बेरूखी के कारण आलू की पछेती फसलों में झुलसा का प्रकोप है। साथ ही मोडक रोग के लक्षण भी दिखाई दिए हैं। उन्होंने किसानों से आलू की फसलों की सिंचाई करने और धूप खिलते ही इसमें दो से 2.50 ग्राम मैंकोजेब-मेटोएक्सिल प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव की सलाह दी है। साथ ही बताया कि पत्तियों के मोडक रोग की रोकथाम 1.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जाना चाहिए।