मंझनपुर (कौशाम्बी)। गोस्वामी तुलसीदास की जन्म स्थली के बारे में विद्यार्थियों को भ्रामक जानकारी दी जा रही है। बेसिक शिक्षा विभाग की कक्षा सात और आठ की किताबों में तुलसीदास का अलग-अलग स्थान पर जन्म स्थान दर्ज है। हैरानी की बात ये है कि आधा शिक्षण सत्र गुजरने के बावजूद शिक्षा विभाग की इस पर निगाह नहीं पड़ी। मंगलवार को जानकारी होने पर बीएएस ने एडी बेसिक के माध्यम से रिपोर्ट शासन को भेजी है।
श्री रामचरित मानस के रचयिता महाकवि गोस्वामी तुलसीदास के जन्म स्थान अपने यहां होने को लेकर प्रदेश के दो जनपद चित्रकूट व कासगंज दावा कर रहे हैं। लंबे अर्से से चल रही बहस को अब बेसिक शिक्षा विभाग ने भी हवा दे दी है। विभाग ने इस बार जूनियर कक्षाओं की अपनी किताबों में भी अलग-अलग जन्म स्थान अंकित कर दिया है। विभाग की ओर बच्चों को मुफ्त में बाटी गई कक्षा सात की मंजरी नामक पुस्तक के पृष्ठ संख्या 39 में तुलसीदास का जन्म स्थान कासगंज जिले का सोरों दर्ज है। जबकि कक्षा आठ की महान व्यक्तित्व नामक किताब के पृष्ठ संख्या 31 में चित्रकूट जनपद का राजापुर अंकित किया गया है। जाहिर है कि अलग-अलग कक्षाओं के छात्र गोस्वामी तुलसीदास के जन्मस्थान के बारे में भिन्न पढ़ाई करेंगे और परीक्षा में भी उन्हें इस समस्या से दो-चार होना पड़ेगा। पुस्तकों में जन्मस्थली के बारे में पता लगते ही मंगलवार को बीएसए अरविंद कुमार ने दोनों कक्षाओं की किताबों का अध्ययन कर एडी बेसिक के जरिए अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी।
प्रख्यात कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के प्रपौत्र एवं भवंस मेहता डिग्री कॉलेज भरवारी के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ विवेक त्रिपाठी का कहना है कि हिंदी साहित्य के अधिकांश विद्वान गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर (चित्रकूट) को ही मानते हैं। स्वयं भारत सरकार और उत्तर प्रदेश शासन इसी को मान्यता देता है। फिर, सरकारी किताबों में तुलसीदास की जन्मभूमि का भिन्न-भिन्न उल्लेख न सिर्फ गंभीर मामला है बल्कि, देश की भावी पीढ़ी के साथ खिलवाड़ भी है। वहीं बीएसए का कहना है कि कक्षा सात और आठ की पुस्तकों में गोस्वामी तुलसीदास के जन्म स्थान अलग-अलग दर्ज होने की जानकारी मिली है। इसकी रिपोर्ट बनाकर एडी बेसिक के जरिए शासन को भेज दी गई है।