कचरा ही बन कर रह गया दोआबा का ‘कचरा’
पांच माह बाद भी नहीं मिला कचरा निस्तारण प्लांट के लिए बजट
नगर पालिका भरवारी में बनना था प्लांट
फोटो नं-12,13,14
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। जिले का कूड़ा-कचरा, प्रशासन की अनदेखी की वजह से ‘कचरा’ ही बनकर रह गया है। नगर पालिका भरवारी में पांच महीने पहले बायोवेस्ट प्लांट लगाने की कार्ययोजना बनी थी लेकिन उसे बनाने के लिए बजट की स्वीकृति नहीं मिल सकी। इसकी वजह से कूड़ा प्रबंधन शहरी और ग्रामीण इलाकों में कहीं भी नजर नहीं आ रहा है।
जिले की नगर पंचायतों से निकलने वाला कचरा या तो किसी तालाब में फेंक दिया जाता है या फिर किसी खाली स्थान पर। यह कचरा आवारा मवेशी फैलाते रहते हैं। जबकि इस कचरे से उर्वरक बनाई जा सकती है। जिसे से निकलने वाला कचरा गंदगी फैलाता रहता है। इसे लेकर पांच महीने पहले कचरा निस्तारण के लिए बड़ी कार्ययोजना तैयार की गई थी। नगर पालिका क्षेत्र भरवारी में बायोवेस्ट प्लांट तैयार किया जाना है। इसकी पूरी रूपरेखा तैयार की गई। शासन से बजट नहीं मिलने की वजह से कचरे का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
अस्पतालों के कचरे का भी नहीं है प्रबंधन
मंझनपुर। जिला अस्पताल सहित सीएचसी, पीएचसी व निजी अस्पतालों को कचरा प्रबंधन के लिए एनओसी लेनी होती है। इसके लिए नैनी की एक संस्था का प्रमाण पत्र लगाया जाता है। संस्था अस्पतालों से निकलने वाले कचरे को उठाने का टेंडर लेती है। लेकिन यह सब कागज पर ही होता है। जिसकी वजह से अस्पतालों का कचरा भी गंदगी फैलाता रहता है।
उर्वरक बनने से जिले का बढ़ता राजस्व
मंझनपुर। कचरा प्रबंधन का इंतजाम होने से जिले के राजस्व में भी इजाफा होता। कचरा एकत्र कर उसमें प्लास्टिक के समानों की छटनी होती। बाकी का बेस्ट उर्वरक बनाने के लिए इस्तेमाल होता। इसकी वजह से जिले के राजस्व को जहां मुनाफा होता वहीं गंदगी का सफाया हो जाता।
इनका कहना है
भरवारी नगर पालिका क्षेत्र में बायोवेस्ट प्लांट बनाने के लिए स्वीकृति मिली थी। यह योजना पांच महीने पहले बनी थी। बजट के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद प्लांट का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
राकेश श्रीवास्तव, एडीएम