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लो-वोल्टेज ने उपभोक्ताओं का पारा किया हाई

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उपभोक्ताओं को रुला रहा लो-वोल्टेज
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पंखे और कूलर चलते तो हैं पर नहीं मिल रही हवा
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। बिजली विभाग लाइट तो दे रहा है, लेकिन वह उपभोक्ताओं के किसी मतलब की नहीं है। लो-वोल्टेज की समस्या कई दिनों से थी, लेकिन शनिवार की रात सारी हदें ही पार हो गई। इस कदर वोल्टेज लो हो गया कि भीषण गर्मी में उपभोक्ताओं का पारा हाई हो गया। अफसरों से उपभोक्ताओं की फोन पर बहस हो गई तो कई उपकेंद्रों में कर्मियों से झड़प हुई।
विद्युत उपभोक्ताओं की समस्या जिले में दूर होती नहीं दिख रही है। जुलाई और अगस्त के महीने में ट्रांसफार्मर फुंकने के कारण लोगों को बिजली नहीं मिल पा रही थी। इससे किसी तरह निजात मिली तो अब लो-वोल्टेज का संकट शुरू हो गया है। उपभोक्ताओं की यह समस्या दिनाेंदिन गहराती जा रही है। शनिवार को तो हालात बद से बदतर हो गए। जिले के उपभोक्ताओं की दी जा रही बिजली का वोल्टेज 133 की जगह सौ केवीए पर आकर अटक कर रह गया। मुख्यालय मंझनपुर का हाल यह था कि यहां पर उपभोक्ताओं के घरों का वोल्टेज 86 एम्पियर बता रहा था। इसके चलते घरों में लगे बल्ब जुगनू की तरह टिमटिमाने लगे और वहीं पंखे, कूलर चल तो रहे थे, लेकिन हवा नहीं दे रहे थे। यही हाल सरायअकिल, गोपसहसा, मनौरी, भरवारी, सिराथू, कमालपुर आदि विद्युत उपकेंद्रों के उपभोक्ताओं का रहा। सरायअकिल के उपभोक्ता तो फेज-टू-फेज कटिया लगाकर वोल्टेज बढ़ाने का प्रयास कर रहे थे पर इसके बाद भी सफलता नहीं मिली। लो-वोल्टेज की शिकायत उपभोक्ताओं ने उपकेंद्रों के जिम्मेदारों से रात में की, जहां उनकी कर्मचारियों से झड़प हो गई। तन्नापर व मंझनपुर उपकेंद्र के कर्मियों के साथ रात दस बजे के बाद नोकझोंक हुई। वहीं अधिकारियों से फोन पर उपभोक्ता उलझे रहे। इसके बाद भी वोल्टेज में सुधार नहीं हुआ। ऐसे में उमसभरी गर्मी में जिले के उपभोक्ताओं की रात की नींद व दिन का चैन बिजली ने छीन रखा है। जिम्मेदार हैं कि वे बिजली की समस्या को लेकर तनिक भी संजीदा नहीं दिख रहे हैं।
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फेज-टू-फेज से फुंक सकते हैं ट्रांसफार्मर
लो-वोल्टेज की समस्या से जूझ रहे उपभोक्ताओं का हाल बेहाल है। ग्रामीण इलाकों के उपभोक्ता घर का वोल्टेज बढ़ाने के चक्कर में फेज-टू-फेज कटिया लगा ले रहे हैं। इसका असर सीधे गांव में लगे ट्रांसफार्मर पर पड़ रहा है। जानकारों की माने तो फेज-टू-फेज कनेक्शन करने से न केवल ट्रांसफार्मर बल्कि लाइन में लगे तार भी गरम पड़कर टूट सकते हैं। ऐसा होने पर गांवों में बड़ा हादसा भी हो सकता है। विभागीय जिम्मेदार हैं वोल्टेज बढ़ाने को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं।


नलकूप भी नहीं उगल रहे पानी
लो-वोल्टेज की समस्या से घरेलू उपभोक्ता तो जूझ ही रहे हैं, किसानों की फसलों पर भी संकट है। निजी नलकूप में लगी मोटर न चलने से किसान फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहा है। ऐसे में तैयार होने के आखिरी पायदान पर खड़ी धान की फसलें भी सिंचाई के आभाव में नष्ट हो रही हैं। इसे लेकर उपभोक्ता गुस्से से उबल रहे हैं।
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अधिक गर्मी के चलते बिजली का उपयोग बढ़ गया है। उधर, पनकी से बिजली का डिस्ट्रीब्यूशन पर्याप्त नहीं हो पा रहा। लो-वोल्टेज की समस्या को लेकर एमडी को मेल भेजा गया है। दो-एक दिन में सुधार का आश्वासन मिला है।
प्रभाकर पांडेय, एक्सईएन विद्युत
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