जिले में पौधरोपण अभियान के तहत हरियाली बिखेरने के दावे लापरवाही की आंच में झुलस गए हैं। यहां जुलाई-अगस्त में वृहद पौधरोपण अभियान के तहत लगाए गए पौधों में 40 फीसदी से ज्यादा सूख गए हैं। इसकी वजह अनदेखी और सुरक्षा उपकरणों का पर्याप्त इंतजाम नहीं होना है। ऐसा नहीं कि विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है। अफसर सबकुछ जानकर भी अंजान बने हुए हैं।
कौशाम्बी जनपद के विभिन्न स्थानों पर पिछले वर्ष पांच जुलाई को 18 लाख 42 हजार 706 पौधे रोपे गए थे। जबकि लक्ष्य 17 लाख 91 हजार 600 का ही था। इसके बाद अगस्त में एक लाख 67 हजार 633 पौधों का रोपण किया गया। वन विभाग ने यहां पौधे तो लक्ष्य से कई कदम आगे बढ़कर रोपित करा दिए मगर, रोपण के बाद इनकी देखभाल करना भूल गए । परिणाम रहा कि 40 फीसदी से अधिक पौधे सूख गए। विभाग का मानना है कि 10 फीसदी पौधे सूखते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बताने को काफी है।
जिले में पहले से ही वन क्षेत्र शून्य है। बावजूद इसके ट्री गार्ड, ईंट का सुरक्षा कवच आदि का इंतजाम कर पौधों को बचाने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। खुद डीएफओ बताते हैं कि जिले भर में करीब 150 ट्री गार्ड और छह सौ के आसपास ईंट के सुरक्षा कवच बनाए गए हैं। बाकी स्थानों पर पौधों की हिफाजत भगवान भरोसे है। हालांकि अफसर इसके लिए स्कूलों की चहारदीवारी, तालाब की बाउंड्री आदि का हवाला देते हैं। बड़ी बात यह है कि जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में लगे पौधों को भी नहीं बचाया जा सका है। अन्य कार्यालयों का भी यही हाल है। तमाम पौधे पशुओं का निवाला बन गए तो अधिकतर सूख गए हैं।
अफसर के पौधे भी सूखे
मंझनपुर। जिले के प्रभारी मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने पांच जुलाई को मंझनपुर स्थित निर्माणाधीन बस डिपो में पौधरोपण किया था। यहां जनपद के सभी विधायक व अन्य नेता तथा अफसर मौजूद थे। प्रभारी मंत्री के द्वारा रोपा गया पौधा सूखकर गायब हो चुका है। ऐसे ही नोडल अफसर नीना शर्मा (सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास) ने लेहदरी गांव के समीप गंगा किनारे पौधरोपण किया था। उनके रोपित पौधे का भी कहीं नामोनिशान नहीं मिल रहा है।