कालरात्रि के दर्शन-पूजन को उमड़े श्रद्धालु
नवरात्र के सातवें दिन घरों और मंदिरों में देवी के कालरात्रि स्वरूप की हुई पूजा
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। नवरात्र के सातवें दिन शुक्रवार को घरों और मंदिरों में भगवती के कालरात्रि की पूजा-अर्चना की गई। देवी की पूजा के लिए मंदिरों में श्रद्धालु उमड़ पड़े। शीतला धाम कड़ा में शक्ति स्वरूप मां भगवती की विधि-विधान से पूजा की गई। इस दौरान देवी के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
आदि शक्ति देवी भगवती का सातवां स्वरूप कालरात्रि का है। नवरात्र के सातवें दिन मां के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। पुराणों के अनुसार देवी का यह स्वरूप अनंत एवं व्यापक है। कालरात्रि अर्थात काल को जीतने वाली। जन्म, पालन और काल देवी के तीन स्वरूप हैं। सृष्टि, संयोजन और संचालन इन्हीं काली जी की कृृपा का फल है। एक बार शिवजी ने देवी को काली कह दिया था। इस कारण उनका नाम काली पड़ गया। माता काली की पूजा से सबकुछ सिद्ध होता है। इस रात्रि अखंड ज्योति जलाकर काले तिलों से पूजन एवं जप-तप करने से मां काली प्रसन्न होती हैं। रात्रि में यज्ञ करने से साधक के मनोरथ पूरे होते हैं। इन्हीं फलों की प्राप्ति के लिए भक्तों ने शुक्रवार को मंदिरों में पहुंचकर मां के कालरात्रि स्वरूप की पूजा की। मंझनपुर, करारी, भरवारी, पश्चिमशरीरा, सरायअकिल, अजुहा, सिराथू चायल समेत जिलेभर के भक्तों ने बाजारों, कस्बों में स्थापित मंदिरों पंडालों में पूजा की। 51 शक्तिपीठों में शामिल कड़ा स्थित मां शीतला की दरबार में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं को घंटों लाइन में लगे रहने के बाद मां का दर्शन प्राप्त हुआ। इसके बाद सभी ने श्रद्धा के साथ मां का पूजन कर आशीष प्राप्त किया।