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तुलसी, एलोवेरा व सतावर से बढ़ेगी आमदनी

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दलहन-तिलहन की तरह अब दोआबा के किसान औषधि खेती की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। इसको परवान चढ़ा रही है उद्यान विभाग की राष्ट्रीय आयुष मिशन योजना। योजना के तहत जिले के किसानों को तुलसी, एलोवेरा और सतावर की खेती कराई जा रही है। विभाग की ओर से इसके लिए तीस प्रतिशत का अनुदान भी दिया जा रहा है। जिले में औषधीय खेती से अब तक करीब 50 किसान जुड़ भी चुके हैं।
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उद्यान विभाग के मुताबिक एक हेक्टेयर में एलोवेरा की खेती पर 62,224 रुपये लागत आएगी। इसमें तीस फीसदी यानी 18,670 रुपये अनुदान दिया जाएगा। इसी तरह तुलसी पर लगभग पांच हजार रुपये लागत और 30 फीसदी का अनुदान मिलेगा। सतावर की खेती में भी लागत का 30 प्रतिशत अनुदान दिए जाने की योजना है। विभाग का मानना है कि औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी, एलोवरा और सतावर की खेती किसानों की आमदनी बढ़ाएगी। ऑनलाइन आवेदन के बाद पहले आओ-पहले पाओ की तर्ज पर लाभार्थियों का चयन होगा। पंजीकरण में खतौनी, बैंक पासबुक व पासपोर्ट साइज फोटो लगेगी। अनुदान राशि डीबीटी के जरिए सीधे लाभार्थी किसान के खाते में भेजी जाएगी। जिला उद्यान अधिकारी सुरेंद्र राम भाष्कर ने बताया कि तुलसी और एलोवेरा दस-दस तथा सतावर की खेती पांच हेक्टेयर क्षेत्रफल में कराने का लक्ष्य प्रस्तावित है। इसके लिए अब तक 50 किसानों का पंजीकरण हो गया है। तुलसी की खेती को लेकर सर्वाधिक 40 किसानों ने पंजीकरण कराया है। सतावर की खेती के लिए तो लक्ष्य ही कम पड़ गया है। जबकि एलोेवेरा की खेती जाड़े में होने की वजह से अभी कम किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

साल में चार मर्तबा निकलती हैं तुलसी की पत्तियां
उद्यान विभाग की मानें तो एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में तुलसी की खेती करने पर 12 से 15 क्ंिवटल पत्तियां पैदा होती हैं। साल में एक ही पौधे से चार मर्तबा पत्तियां निकलती हैं। बाजार में तुलसी की सूखी पत्तियों के भाव 50-60 रुपये किलो है। इसी तरह से एलोवेरा के पत्ते की भी बाजार में ठीकठाक कीमत है। एलोवेरा की भी तीन फसल साल में ली जा सकती है। इसके पत्तों से जेल बनता है।
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तुलसी,एलोवेरा व सतावर के औषधीय गुण
औषधीय गुणों से भरपूर होने के साथ ही तुलसी का धार्मिक महत्व भी है। इसके पौधे की पूजा होती है। पत्ती औषधि गुणों की खान है। इसकी पत्तियों को लोग विभिन्न तरीकों से इस्तेमाल करते हैं। पौधा छोटा होने के कारण लोग घर के गमलों में तुलसी को लगाते हैं। सर्दी, जुकाम, बुखार आदि में लोग तुलसी की पत्ती को चाय में डालकर सेवन करते हैं। इसी तरह से एलोवेरा(घृतकुमारी) का उल्लेख आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में है। कई नामचीन कंपनियां इसके तमाम उत्पाद तैयार कर बाजार में बिक्री कर रही हैं। इसका रस पेट, त्वचा समेत कई बीमारियों में फायदेमंद होता है। सौंदर्य प्रसाधान की सामग्री तैयार करने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। जबकि सतावर का इस्तेमाल स्वास्थ्यवर्धक दवाओं में किया जाता है।

मुफीद है दोआबा की मिट्टी
उद्यान निरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह के मुताबिक तुलसी, एलोवेरा और सतावर की खेती के लिए दोआबा की जलवायु और मिट्टी काफी मुफीद है। गंगा की तराई में दोमट और भुरभरी मिट्टी होने की वजह से सिराथू तहसील क्षेत्र के किसान औषधीय खेती में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
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