मंझनपुर। बाजार में बिकने के लिए जा रहे कोटे के राशन को ग्रामीणों ने घेराबंदी कर लोडर सहित पकड़ लिया। ग्रामीण कोटेदार के खिलाफ मुकदमा लिखाने की जिद पर अड़े थे। रात को मौके पर पहुंची पुलिस ने राशन कब्जे में लेना चाहा, लेकिन ग्रामीण सहमत नहीं हुए। रविवार सुबह नायब तहसीलदार ने कोटेदार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का आश्वासन देकर राशन और गाड़ी पुलिस के हवाले कर दिया।
कौशाम्बी ब्लॉक के गोहरा मारुफपुर गांव के लोगों की शिकायत थी कि कोटेदार इसरार अहमद उन्हें समय से राशन नहीं देता है। कई-कई महीने का राशन ब्लैक कर लिया जाता है। पिछले दिनों कोटेदार के यहां गोदाम से राशन आया था। इस पर ग्रामीण उसकी निगरानी कर रहे थे। शनिवार रात करीब 12 बजे एक लोडर कोटेदार के यहां आकर रुकी। ग्रामीणों ने लोडर देखा तो घेराबंदी कर दी। रात दो बजे वाहन में माल लोड कर उसे ले जाया जाने लगा। अंधेरे के बावजूद गाड़ी की लाइट नहीं जलाई गई थी। इस पर ग्रामीणों शक यकीन में बदल गया। उन्होंने पीछा करके गांव के बाहर गाड़ी को पकड़ लिया। मामले की सूचना किसी ने पुलिस को दी। पुलिस गाड़ी को थाने ले जाने लगी लेकिन ग्रामीण राजी नहीं हुए। उनका कहना था कि प्रशासनिक अफसर आने के बाद ही वह गाड़ी को छोड़ेंगे। सुबह सदर तहसील के नायब तहसीलदार कृष्णचंद्र मिश्रा गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों का बयान दर्ज किया। हरिश्चंद्र ने बताया कि उसे पिछले आठ महीने से राशन नहीं दिया गया।
रेखा देवी का कहना था कि कोटेदार ने राशन कार्ड बनाने के नाम पर उससे पांच सौ रुपये की रिश्वत ली है। इसी तरह कमला देवी, चमेली देवी, मसुरियादीन, उमा देवी आदि ने भी राशन नहीं मिलने का आरोप लगाया। नायब तहसीलदार ने आश्वस्त किया कि मामले की रिपोर्ट वरिष्ठ अफसरों को देंगे। गाड़ी में करीब 20 बोरी गेहूं और तकरीबन 18 बोरी चावल मिला है। राशन कोटे का है या नहीं? इस बाबत स्टाक रजिस्टर जब्त कर मिलान किया जाएगा। कोटेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस पर ग्रामीण मानें और गाड़ी व राशन पुलिस के हवाले किया गया। इस बाबत कोटेदार का कहना है कि गाड़ी में जो बोरी बरामद हुई है वह सरकारी नहीं है।