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समानता, सरलता और गरिमा से जीवन जीना है मानवाधिकार

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समानता, सरलता और गरिमा से जीवन जीना है मानवाधिकार
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करारी के डॉ रिजवी कॉलेज में मानव अधिकार जागरूकता सेमिनार
में बोले न्यायमूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो
करारी। मानवाधिकार का मतलब समानता, सरलता और गरिमा से जीवन जीने का हक है। मानवाधिकार दो तरीके से प्राप्त होता है। नैसर्गिक व कानूनी। यदि थाने में कोई आपका केस दर्ज ना करें तो आपके पास न्यायालय में मामला दर्ज करने का अधिकार प्राप्त है।
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यह बातें करारी के डॉ. रिजवी कॉलेज में शनिवार को मानव अधिकार जागरूकता सेमिनार में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज सुधीर नारायण अग्रवाल ने बतौर मुख्य अतिथि कहीं। उन्होंने घरेलू हिंसा के विषय में विस्तार से बताया। कहा कि मानव अधिकार वह अधिकार है जो किसी भी व्यक्ति के लिए सामान्य रूप से जीवन बिताने एवं उसके अस्तित्व के लिए आवश्यक है। न्यायमूर्ति आरसी दीपक ने कहा कि आज मनुष्य की सबसे बड़ी जरूरत शिक्षा और स्वास्थ्य आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गई है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। जिला जज कौशाम्बी महफूज अली ने कहा कि मानवाधिकार का सवाल मानव गरिमा की रक्षा से शुरू हुआ। वर्तमान दौर में जो राजनीति हो रही है वो मानवाधिकारवादी नहीं है। एचआरपीओ की महासचिव दुर्गावती चौधरी ने कहा कि सभी लोगों को अपने अधिकार के प्रति सचेत रहना चाहिए। आज भारत में कई कानून होने के बावजूद घरेलू हिंसा, महिला अत्याचार, दुराचार जैसी वारदातें हो रही हैं। संगीन जुर्म भी अनसुलझी गुत्थी बन जाते हैं। एचआरपीओ की उपाध्यक्ष प्रिया सोनी खरे ने कहा कि मानवाधिकार बाजार का विषय नहीं है, इसके लिए समुचित ज्ञान का होना आवश्यक है। मानवाधिकार का अपना स्वयं का विधिशास्त्र है जो कि संदर्भगत होता है। मानवाधिकार का धारक मानव ही हो सकता है, कोई अन्य संस्था नहीं। इस मौके पर एचआरपीओ के अंतराष्ट्रीय चेयरमैन अभिषेक कुमार श्रीवास्तव, गुलफाम अली ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में रिजवी ट्रस्ट के चेयरमैन राशिद रिजवी, आलोक श्रीवास्तव, रंजीत जायसवाल, महेंद्र केसरवानी,अरविंद कुमार यादव, कुर्बान अली, अनिल प्रजापति, अंकित गुप्ता,गणेश वर्मा, वीरभान आदि लोग मौजूद रहे।
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फोटो नं-29,30-करारी के डॉ रिजवी कॉलेज में शनिवार को आयोजित मानव अधिकार जागरूकता सेमिनार को संबोधित करते न्यायमूर्ति आरसी दीपक व सेमिनार में मौजूद लोग
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