आंगनबाड़ी केंद्र बदहाल, कैसे स्वस्थ होंगे नौनिहाल
जर्जर भवनों में गंदगी के बीच बच्चों को सेहतमंद बनाने की कोशिश
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
नौनिहालों की सेहत को लेकर सरकार फिक्रमंद है। इसके लिए गांव-गांव आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए हैं। पर, हकीकत इसके विपरीत है। दरअसल जिले में संचालित अधिकतर केंद्रों के भवन जर्जर हैं। तमाम केंद्रों के पास तो अपना भवन ही नहीं है। बदहाल केंद्रों में गंदगी के बीच हर पल नौनिहालों की जिंदगी का खतरा बना रहता है। सैकड़ों केंद्र किराए के भवन या फिर परिषदीय स्कूलों में संचालित हो रहे रहे हैं। अव्यवस्थाओं के बावजूद विभाग इनकी सुध नहीं ले रहा है। कुछ केंद्र ऐसे भी हैं जहां भवन बनने के बावजूद केंद्र का संचालन नहीं हो रहा है। तमाम ऐसे भी हैं जहां बुनियादी सुविधाओं का टोटा है। सोमवार को अमर उजाला टीम ने आंगनबाड़ी भवनों का जायजा लिया तो कुछ तस्वीर साफ हुई।
आगनबाड़ी केंद्र विभागीय लापरवाही का शिकार
मनौरी (ब्यूरो)। नेवादा ब्लॉक के मखऊपुर मजरा पिपरी में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र विभागीय लापरवाही का शिकार है। केंद्र का भवन पिछले पांच साल से जर्जर है। बारिश में छत से पानी टपकता है। जर्जर भवन कभी भी धाराशाही हो सकता है। समय रहते नहीं ध्यान दिया गया तो बड़ा हादसा होना तय है। आंगनबॉड़ी कार्यकर्ता सुनीता यादव खुद विभागीय अधिकारियों के रवैए से नाखुश हैं। उनका कहना है कि केंद्र में पंजीकृत 56 बच्चों को पोषाहार भी नहीं मिल रहा है। दस महीने से मानदेय नहीं मिलने के कारण खुद उनका भी केंद्र संचालन में मन नहीं लग रहा है।
केंद्र में चल रहीं परिषदीय कक्षाएं
पश्चिमशरीरा (ब्यूरो)। इस गांव में छह आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें से पांच केंद्र कार्यकर्ता अपने-अपने घर में चला रहे हैं। ऐसे में यहां केंद्र संचालन की महज औपचारिकता होती है। बाकी बचे एक केंद्र का भवन अभी हाल ही में बना है। पर, यहां आंगनबाड़ी की जगह परिषदीय विद्यालय की कक्षाएं संचालित हो रही हैं। सोमवार को 11.30 बजे पहुंची अमर उजाला टीम ने ऐसा ही कुछ नजारा देखा। यहां कार्यकर्ता ऊषा देवी और सहायिका का गायब रहीं। जूनियर विद्यालय की हेडमास्टर सोमा देवी ने बताया कि उनकी बिल्डिंग जर्जर होने के कारण कक्षाएं आगंनबॉडी भवन में चलाई जा रही है।
महज छह साल में जर्जर हो गया भवन
कड़ा (ब्यूरो)। स्थानीय ब्लॉक के कमालपुर गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र भी बदहाल है। छह साल पहले भवन जर्जर हो गया है। आसपास गंदगी पसरी हुई है। दरवाजा भी टूटा हुआ है। इन्हीं गंदगी के बीच बच्चों को बैठाया जाता है। कार्यकर्ता मनीषा श्रीवास्तव का कहना है कि भवन की बदहाली के बारे में अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
आकड़ों पर एक नजर-
जिले में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र-1775
निजी भवन में संचालित आंगनबॉड़ी केंद्र-410
किराए के भवन में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र-200
परिषदीय स्कूलों में संचालित आंगनबॉड़ी केंद्र-1165
इनका कहना है
जिले में 410 आंगनबाड़ी केंद्र निजी भवन में संचालित किए जा रहे हैं। 152 नए भवनों का निर्माण प्रस्तावित है। पर्याप्त संख्या में निजी भवन नहीं होने से कुछ दिक्कतें जरूर आ रही हैं। पर, मौजूद संसाधनों में ही योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का प्रयास किया जा रहा है।
राकेश मिश्र-प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी
फोटो नं-1,2,3