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मानदेय और बहाली को डिप्टी सीएम से मिले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता

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मानदेय और बहाली को डिप्टी सीएम से मिले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
मंझनपुर (ब्यूरो)। आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष माया सिंह शुक्रवार को डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मिलीं। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों द्वारा लगातार किए जा रहे उत्पीड़न, काटे गए मानदेय व सेवा समाप्त किए जाने की शिकायत किया। आरोप लगाया कि भाजपा सरकार को बदनाम करने के लिए महकमे के अधिकारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ ऐसा बर्ताव कर रहे हैं। डिप्टी सीएम को बताया कि लखीमपुर खीरी में आठ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा समाप्त कर दी गई है। इससे उनका परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है। इसके अलावा कभी तीन माह तो कभी पांच का वेतन कार्यकर्ताओं का काट लिया जाता है। उन्होंने डिप्टी सीएम से अफसरों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग किया। डिप्टी सीएम ने मामले में कार्रवाई का भरोसा प्रदेश अध्यक्ष को दिया है। शिकायत करने वालों में जिला महामंत्री सुषमा सिंह, उपाध्यक्ष संजना दीक्षित समेत दर्जन भर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल रहे।
फोटो नं-

दो दिन से गायब असलहा क्लर्क, चक्कर काट रहे आवेदक
मंझनपुर (ब्यूरो)। कलक्ट्रेट के शस्त्र कार्यालय में तैनात लिपिक दो दिन से गायब है। कार्यालय में ताला लटकता देख शस्त्र लाइसेंस के आवेदक मायूस होकर लौट रहे हैं। आवेदकों के अलावा लाइसेंस का रेन्युअल कराने व शस्त्र संबंधी अन्य जानकारी के लिए आने वाले फरियादियों को भी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
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शस्त्र लाइसेंस स्वीकृति पर लगी रोक हटने के बाद से आवेदकों में फार्म भरने की होड़ सी लग गई है। प्रतिदिन शस्त्र कार्यालय से दो सौ फार्मों की बिक्री तो इतने ही आवेदन जमा किए जा रहे हैं। इसे लेकर शस्त्र कार्यालय में सुबह से ही लोगों की भीड़ लग जाती है। गुरुवार की सुबह वरासत का लाइसेंस लेने के लिए एक आवेदक डीएम मनीष कुमार वर्मा के पास पहुंचा। मामला वरासत का होने की वजह से डीएम ने सक्रियता दिखाते हुए लिपिक को तलब किया। जानकारी हुई कि लिपिक किसी काम से न्यायालय में हैं। चार बजे तक नहीं आने पर फरियादियों को बैरंग लौटना पड़ा। यही हाल शुक्रवार को भी रहा। पूरे दिन शस्त्र कार्यालय में ताला लटकता रहा। शस्त्र लाइसेंस का फार्म लेने, आवेदन जमा करने व रेन्युअल कराने के लिए लोग दिनभर लिपिक का इंतजार करते रहे।
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उपभोक्ताओं के बीच डूबे 24 लाख रुपये की वसूली
बकाया वसूली में शून्य से उत्साहजनक स्थिति में पहुंचा जिला
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। विद्युत बकाए की वसूली में जिला पिछले माह तक राजस्व परिषद के आंकड़ों में शून्य पर था। दिसंबर माह के पहले सप्ताह में ही अचानक उछाल मारकर उत्साहजनक स्थिति में पहुंच गया। इसकी जानकारी डीएम को हुई तो उन्होंने एडीएम की पीठ थपथपाई।
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राजस्व परिषद लखनऊ के आंकड़ों में बिजली विभाग की राजस्व वसूली पूरे वित्तीय वर्ष में शून्य पर चली आ रही थी। बकाए की वसूली में खराब प्रगति पर जिले के अफसरों को समीक्षा के दौरान शर्मिंदा होना पड़ता था। मामले को डीएम मनीष कुमार वर्मा ने गंभीरता से लिया। पिछले माह हुई राजस्व वसूली की बैठक में उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए मानीटरिंग का निर्देश एडीएम राकेश कुमार श्रीवास्तव को दिया। नवंबर माह में एडीएम के नेतृत्व में बिजली विभाग ने 24 लाख रुपए राजस्व की वसूली किया। इसके बाद भी राजस्व परिषद के आंकड़ों में प्रगति नहीं हुई। मामले को गंभीरता से लेते हुए एडीएम नवंबर माह के आखिरी सप्ताह में लखनऊ गए और राजस्व परिषद के अधिकारियों से मिलकर कप्यूटर में दर्ज खाके को दुरुस्त कराया। राजस्व वसूली का आंकड़ा राजस्व परिषद के खाके में दर्ज हुआ तो जिला शून्य से उत्साहजनक स्थिति में पहुंच गया।
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