मंझनपुर/पश्चिमशरीरा (कौशाम्बी)। मेडिकल छात्रा से रेप के आरोप में उम्रकैद की सजा पाने वाले वाला फलाहारी बाबा 28 वर्ष पूर्व बीवी को छोड़कर चला गया था। इस दौरान उसने कभी पलटकर घर की ओर देखा तक नहीं। हालांकि उसकी करतूतों पर परिजनों के साथ ग्रामीण भी विश्वास नहीं कर रहे हैं। पर, परिवार वाले यह भी साफ कह रहे हैं कि उनका बाबा से अब कोई वास्ता नहीं है।
कौशलेन्द्र प्रपन्नाचार्य उर्फ फलाहारी बाबा मूलत: कौशाम्बी जिले के डकशरीरा गांव का रहने वाला है। वे तीन भाई हैं। मझला भाई रामनारायण ही गांव में रहता है। सबसे छोटा शिवबाबू भी साधु है। रामनारायण के मुताबिक करीब 90 के दशक में फलाहारी अपनी पत्नी सीता और उस वक्त दो साल की रही बेटी को छोड़कर घर से भाग गया था। काफी खोजबीन के बाद भी उसका कहीं कोई सुराग नहीं लगा। सितंबर 2017 में मेडिकल छात्रा ने उसपर यौन शोषण का आरोप लगाया और मामला सुर्खियों में आया तो परिजनों को पता चला कि बाबा राजस्थान के अलवर में रह रहा है।
हालांकि परिवार वालों ने उससे मिलने की कोशिश नहीं की। बुधवार को अलवर की कोर्ट ने बाबा को उम्रकैद की सजा सुनाई तो मीडिया के जरिये इसकी जानकारी पाकर ग्रामीण व परिवारीजन सन्न रह गए। मंझले भाई रामनारायण, गांव के जितेन्द्र पांडेय, शिवबालक गर्ग, शीतला प्रसाद, संदीप पांडेय, विनय त्रिपाठी आदि का कहना है कि जो व्यक्ति युवावस्था में बीवी को छोड़कर वैराग्य ले सकता है, वह वृद्धास्था में दुष्कर्म नहीं करेगा। उधर, कुछ ग्रामीणों ने ये भी कहा कि कलियुग में बाबाओं का कुछ भी कर गुजरना असंभव नहीं है।
बेटी का हो चुका है विवाह, बीवी है मायके में
मंझनपुर। फलाहारी बाबा की बेटी का सालों पहले विवाह हो चुका है। चाचा व अन्य परिवारीजनों ने उसकी शादी की। बाबा की पत्नी सीता करीब 20 दिन पहले मायके धरकोर्रा (चित्रकूट) गई है। सितंबर 2017 में बाबा के जेल जाने के बाद बीवी से बातचीत की गई थी तो उसका साफ कहना था कि पति से उसका कोई मतलब नहीं है, न ही वह उसके बारे में कोई बात करना चाहती है।
इतनी क्षमता नहीं कि कचहरी का चक्कर लगाएं
मंझनपुर। बाबा के छोटे भाई रामनारायण का कहना है कि दुराचार का आरोप निराधार है। आश्रम पर कब्जे के विवाद में छात्रा ने उनपर आरोप लगाया है। छात्रा दूसरे पक्ष से ताल्लुक रखती है। जमानत कराने के सवाल पर रामनारायण का साफ कहना था कि उनकी इतनी क्षमता ही नहीं है कि कचहरी का चक्कर लगाएं। आश्रम के लोग बेल कराएंगे। आरोपों को झूठा बताने वाले भाई रामनारायण बाबा से मुलाकात करने जेल जाने को भी तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि अब कोई वास्ता ही नहीं है तो फिर मुलाकात किस बात की?
राजस्थान में बनाया करोड़ों का साम्राज्य
मंझनपुर। फलाहारी बाबा लगभग 90 के दशक में घर छोड़कर राजस्थान पहुंचा। शुरूआती दौर में वह वहां अलवर स्थित नारायणी धर्मशाला में रहता था और कथा सुनाकर जीविकोपार्जन करता था। बाद में उसे नारायणी धर्मशाला से बेदखल कर दिया गया था। इसी बीच उसने कई संभ्रांत परिवारों और राजनेताओं से संपर्क बनाया। 1998 काला कुंआ (अलवर) के पास 400 वर्ग गज जमीन खरीदकर अपना आश्रम बनाया। इसके बाद फिर आगे ही बढ़ता गया। मौजूदा समय उसका राजस्थान में करोड़ों की संपत्ति है।
दक्षिण की तर्ज पर बनवाया मंदिर
मंझनपुर। बाबा ने दक्षिण भारत की तर्ज पर 1998 के बाद अलवर में वेेंकटेश बालाजी मंदिर का निर्माण कराया, जिसमें करोड़ों रुपये खर्च हुए। बाबा के राजस्थान में कई बड़े आश्रम, स्कूल और धर्मशालाएं भी हैं। आरोप लगने के बाद प्रापर्टी की जांच शुरू हो गई थी।