करारी/भरवारी। इलाके में गुरु पूर्णिमा का पर्व परंपरागत तरीके से मनाया गया। इस मौके पर छात्रों ने गुरुजनों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। साथ ही उपहार भी दिए। इसके अलावा लोगों ने दालपूड़ी और आम का भोजन अपने इष्टमित्रों को कराकर स्वंय किया।
आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। शुक्त्रस्वार को जिले में गुरुपूर्णिमा मनाया गया। हुबलाल संस्कृत महाविद्यालय भरवारी में विद्यार्थियों ने गुरुजनों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और उपहार दिए। जबकि महाविद्यालय के प्राचार्य मुरलीधर मिश्र ने आचार्यों के साथ अपने-अपने गुरुओं की प्रतिमाओं के सामने बैठकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा की। प्राचार्य ने कहा कि गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरम्भ में आती है। इस दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं।
जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है। इस दिन दाल पूड़ी और आम खाने का विधान है। इस मौके पर लोगों ने अपने इष्ट मित्रों को दाल पूड़ी और आम खिलाकर स्वंय भी खाया। इसी तरह सिराथू क्षेत्र में जगह-जगह पर गुरु पूजा का आयोजन किया गया। रामपुर धमावा स्थित त्यागी जी महाराज के आश्रम में धूमधाम से गुरु पूर्णिमा मनाई गई। अथसराय गाव के नागा आश्रम में दो दिवसीय मेले का आयोजन किया गया है।