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द्वाबा की बंद सहकारी समितियों में चुनावी शोर

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द्वाबा की बंद सहकारी समितियों में चुनावी शोर
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-दशकों से ठप है जिले की कई समितियों का संचालन
फोटो नं-21 बंद पड़ी मनौरी के जनका गांव स्थिति सहकारी समिति
मनौरी (ब्यूरो)। इसे शासन की मंशा कहें या फिर गैर जिम्मेदाराना रवैया। प्रस्तावित सहकारी समितियों की चुनावी तैयारियां तो ऐसा ही कुछ बयां कर रही हैं। बंद समितियों में चुनाव के लिए गंभीर शासन उनके संचालन को लेकर कतई संजीदगी नहीं दिखा रहा है। नतीजतन प्रभावित किसानों में मायूसी है।
दोआबा के किसानों की सहूलियत के लिए इस समय 214 सहकारी समितियां है। इसमें से 23 सहकारी समितियां घाटे पर चल रही हैं। जबकि 50 से अधिक ऐसी सहकारी समितियां हैं जो करीब एक दशक से बंद हैं। ऐसी समितियों का संचालन नहीं होने से क्षेत्र के किसानों को सहूलियत के बजाय कठिनाई झेलनी पड़ रही है। किसानों को दूसरे समिति का सहारा लेना पड़ रहा है। बंद पड़ी समितियों के लिए हो रहे चुनाव को लेकर किसान तो मायूस हैं। लेकिन चुनाव के लिए लोग कमर भी कसे हुए हैं। आगामी 16 जनवरी से समितियों में चुनाव प्रक्त्रिस्या शुरू हो जाएगी। लेकिन ऐसी समितियों का संचालन नहीं होने के कारण क्षेत्र के किसानों में नाराजगी है।
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एक दशक से बंद है जनका सहकारी समिति
चायल क्षेत्र के जनका गांव की सहकारी समिति का संचालन पिछले एक दशक से बंद है। इस समिति के जरिए महमूदपुर मनौरी, मोहम्मदपुर, निजामपुर पुरैनी, मादपुर, मीरपुर, आदि सहित इलाहाबाद के दर्जन भर गांवो के किसानों को लाभ मिलता था। समिति बंद होने से इन गांव के किसानों को 10 किलोमीटर दूर चायल खास स्थित सहकारी समिति का सहारा लेना पड़ता है। समिति का संचालन नहीं होने से भवन भी जर्जर स्थिति में है। गांव के लोग इस भवन को अपने निजी प्रयोग में उपले कंडे व मवेशी बांधने के काम मे ले रहे हैं।
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इलाके की बंद सहकारी समितियां-
साधन सहकारी समिति जनका
साधन सहकारी समिति कसेंदा
साधन सहकारी समिति गांजा
साधन सहकारी समिति मकनपुर
साधन सहकारी समिति बिहका
साधन सहकारी समिति काजीपुर
साधन सहकारी समिति बड़ेगांव
साधन सहकारी समिति अहमदपुर
साधन सहकारी समिति असरौली
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संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका
मंझनपुर (ब्यूरो)। द्वाबा के गांवों को साफ-सुथरा रखने के लिए प्रतिमाह लाखों रूपया सफाई के नाम पर पानी की तरह बहाया जा रहा है। इसके बाद गांवों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। सरसवां ब्लाक के टिकरा गांव में तैनात सफाई कर्मी के नियमित गांव नहीं आने से जगह-जगह कूडे़ का ढेर लगा है। पानी निकासी के लिए बनी नालियंा चोक हो चुकी हैं। ऐसे में लोगों को संक्रामक बीमारी फै लने की आशंका बनी हुई है। गांव के कमलेश सिंह, सुरेश कुमार, रामदीन आदि का आरोप है कि शिकायत के बाद भी सफाई कर्मी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसे लेकर लोगों में जबरदस्त गुस्सा है।
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