घर में पड़ी बची-खुची दवाएं भी किसी के काम आ सकती हैं। गरीबों को यह नई जिंदगी दे सकती हैं। इसी सोच के साथ करारी के समाज सेवियों ने गरीबों के लिए दवा बैंक खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बुधवार रात हुई बैठक में इसका निर्णय हो चुका है। आने वाली 15 तारीख को इसका पूरा खाका खींचकर घरों से दवाओं को इकट्ठा करने का काम शुरू हो जाएगा। इसके बाद बीमार लोगों को डॉक्टरों की सलाह पर बैंक से दवा उपलब्ध कराई जाएगी।
गरीब तबके के लोग महंगी दवाएं नहीं खरीद पाते हैं। वहीं अमीर व रसूखदार लोग दस से 15 दिन की दवाएं तो खरीद लेते हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल वे चार से पांच दिन ही करते हैं। तबियत सही होने पर वे दवा लेना बंद कर देते हैं। ऐसे में यह दवाएं पड़ी ही रहती हैं। उनके लिए यह दवाएं बेकार हो जाती हैं। बुधवार रात खिदमत फाउंडेशन के अध्यक्ष परवेज रिजवी के आवास पर समाज सेवियों की बैठक हुई।
इसमें शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना जमीर हैदर रिजवी ने कहा कि गरीब व निर्धन लोग अपना इलाज सही से नहीं करा पा रहे हैं जबकि लोगों के घरों में बड़ी मात्रा में दवाएं पड़ी रह जाती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि हम दवा बैंक बनाकर इन दवाओं को इकट्ठा करें तो गरीबों को बहुत फायदा हो सकता है। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि करारी नगर पंचायत के सभी मोहल्लों में दो से तीन जगह चिह्नित किए जाएंगे।
इन चिह्नित स्थलों पर ही दवाएं इकट्ठा की जाएंगी। इसके बाद इनको सुरक्षित तरीके से कार्यालय में रखवाया जाएगा। दवा इकट्ठा होने के बाद डॉक्टर बुलाकर उन्हें दिखाया जाएगा कि दवा इस्तेमाल करने लायक है या नहीं। इसके बाद जरूरतमंदों को पर्चे के हिसाब से उपलब्ध दवा दी जाएगी। इस बैठक में अजीज हसन, राजेश जायसवाल, हरिश गुप्ता, मकसूद शेख, अशोक जायसवाल, मो. असलम, बन्ने शेख, हरिश्चंद्र चौरसिया, प्रधान हरिकृष्ण गुप्ता आदि लोग रहे।
घरों में पड़ी दवाएं गरीबों को देंगी नई जिंदगी
घर-घर जाकर बची दवाएं इकट्ठा करेंगे समाज सेवी
डॉक्टर की सलाह पर गरीबों को मुहैया कराई जाएंगी दवा
घर-घर जाकर इकट्ठा की जाएगी दवा
समाज सेवियों ने दवाओं को इकट्ठा करने के लिए युवाओं की एक टीम हर मोहल्ले में बनाई जाएगी। यही टीम घर-घर जाकर लोगों के यहां से बची हुई दवा को इकट्ठा करेगी। टीम को प्रशिक्षण दिया जाएगा कि वह दवा लेते वक्त यह सावधानी जरूर बरतें कि एक्सपायर दवा न लें। हालांकि यदि ऐसी चूक हो भी जाती है तो उसकी दवा बैंक में अलग से जांच होगी, तभी वह वहां रखी जाएगी।
दवा बैंक की सफलता के बाद लिए जाएंगे कपड़े
मौलाना जमीर हैदर रिजवी व उनके साथियों ने घोषणा की है कि यदि दवा बैंक सफल रहा तो इसके बाद वे लोगों के यहां से पुराने कपड़े भी लेंगे ताकि गरीबों की मदद की जा सके। उन्होंने बताया कि तमाम ऐसे लोग होते हैं जो पुराने कपड़ों का इस्तेमाल नहीं करते हैं। वहीं गरीब तन ढांकने के लिए मारा-मारा फिरता है। ऐसे लोगों की मदद के लिए कपड़े भी इकट्ठे किए जाएंगे।