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तथागत की तप स्थली में नहीं हो पा रहा मरीजों का इलाज

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तथागत की तपस्थली में नहीं हो पा रहा मरीजों का इलाज
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सवा लाख की आबादी वाले क्षेत्र के चारों अस्पतालों में स्टाफ का अभाव
दोपहर बाद अस्पतालों में लटक जाता है ताला
अमर उजाला ब्यूरो
बारा। तथागत भगवान बुद्ध की तपस्थली बारा में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल है। सवा लाख की आबादी वाले क्षेत्र में कहने को तो एक सीएचसी और तीन न्यू पीएचसी है लेकिन वहां स्टाफ की खासी कमी है। नतीजतन यहां आने वाले मरीजों को रेफर होकर या तो जिला अस्पताल आना पड़ता है या फिर उन्हें प्रयागराज भेज दिया जाता है।
कौशाम्बी विकास खंड के बारा में सामुदायिक स्वास्थ केंद्र है। यह अस्पताल 30 बेड का है। अस्पताल को फर्स्ट रेफरल यूनिट का दर्जा प्राप्त है। इसके बाद भी इस अस्पताल में स्टाफ की खासी कमी है। अस्पताल में अधीक्षक सहित नौ चिकित्सकों की तैनाती होना चाहिए। बावजूद इसके यहां अधीक्षक डॉ. आशीष गुप्ता और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेश सिंह ही तैनात है। इसके अलावा यहां पर फिजिशियन, सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट आदि के पद करीब दो साल से रिक्त है। यहां पर हर महीने करीब चार हजार मरीजों की ओपीडी तो होती है लेकिन ज्यादातर यहां से रेफर कर दिए जाते हैं। सुरक्षित प्रसव को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार भले ही गंभीर हो लेकिन सीएचसी बारा के हालात सरकारी दावों की हवा निकाल रहे हैं। अस्पताल में हर महीने करीब 15 सौ महिलाओं की ओपीडी होती है। दो सौ के करीब प्रसव होते हैं। इन प्रसव का जिम्मा मात्र दो स्टाफ नर्स के भरोसे है। सीएचसी बारा में तीन सफाई कर्मियों की तैनाती होनी चाहिए। इसके बावजूद यहां पर मात्र एक सफाई कर्मी तैनात किया गया है। जिससे अस्पताल परिसर में गंदगी रहती है। मरीजों को ठंडा पानी उपलब्ध कराने के लिए वाटर कूलर तो लगा है लेकिन वह भी खराब है।
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फार्र्मासिस्ट के भरोसे जुगराजपुर पीएचसी
बारा। नवीन प्राथमिक स्वास्थ केंद्र जुगराजपुर में काफी दिनों से चिकित्सक को तैनात नहीं किया गया। यहां पर फार्र्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय मरीजों को दो दवा देते हैं। ओपीडी रजिस्टर से पता चलता है कि यहां हर महीने करीब दो हजार मरीजों का पंजीकरण किया जा रहा है। अब उनके इलाज के बाबत खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
अकेले चिकित्सक चला रहे अस्पताल
बारा। नवीन प्राथमिक स्वास्थ केंद्र कनैली के हालात भी काफी खराब है। यहां पर डॉ. रामकृष्ण बर्मा की तैनाती तो है लेकिन फार्मेसिस्ट नहीं है। वह मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण भी करते हैं और खुद स्टोर से दवा लाकर उन्हें देते भी है। यहां पर करीब दो हजार मरीजों की हर महीने ओपीडी दिखाई जा रही है।
म्योहर के अस्पताल में चोरों की निगाह
बारा। नवीन प्राथमिक स्वास्थ केंद्र म्योहर में आयुष विंग के चिकित्सक डॉ. चंद्रशेखर की तैनाती है। इस अस्पताल की हालत काफी दयनीय है। पिछले छह महीने के दौरान अस्पताल में दो बार चोरी हो चुकी है। अस्पताल की बायोमैट्रिक मशीन तक चोर उठा ले गए हैं। अस्पताल में इलाज के नाम पर सिर्फ औपचारिकता की जा रही है।
बदहाल है सीएचसी का हॉस्टल
बारा। यमुना के किनारे स्थित सीएचसी बारा में चिकित्सकों की तैनाती नहीं लेने के पीछे एक और बड़ा कारण सामने आया है। यहां चिकित्सकों के रहने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पताल परिसर में जो आवास बने हैं वह काफी बदहाल है। इस वजह से यहां कोई तैनाती नहीं लेना चाहता। दोपहर बाद अस्पताल में ताला बंद हो जाता है।
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इनका कहना है
सीएचसी सहित ब्लाक क्षेत्र के सभी अस्पतालों में स्टाफ की खासी कमी है। हर महीने होने वाली विभागीय मीटिंग में अपनी बात रखी जाती है। चिकित्सकों की तैनाती शासन स्तर से नहीं होने से दिक्कत है। सबसे ज्यादा ज्यादा परेशानी महिलाओं को इलाज कराने में हो रही है।
डॉ. आशीष गुप्ता, अधीक्षक, सीएचसी बारा
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