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दलित वोटों में सेंधमारी के लिए कांग्रेस ने गिरीश पर लगाया दांव

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दलित वोटों में सेंधमारी के लिए कांग्रेस ने गिरीश पर लगाया दांव
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2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा से आजमा चुके हैं किस्मत
चायल विधानसभा में बिरादरी के बीच ठीकठाक मानी जाती है पकड़
फोटो नं-
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। कौशाम्बी (सु) संसदीय सीट से जनसत्ता दल के बाद शनिवार को कांग्रेस पार्टी ने भी अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। पार्टी ने चायल तहसील के तिल्हापुर गांव निवासी दलित नेता गिरीश पासी को चुनावी समर में उतारा है। गिरीश ने पखवाड़े भर पहले ही पार्टी का दामन थामा था। क्षेत्र में बिरादरी के बीच अच्छी पैठ को भुनाने के लिए कांग्रेस की ओर से खेले गए इस दांव से विपक्षियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
गिरीश पासी का सियासी सफर वर्ष 1991 में चायल विधानसभा क्षेत्र से निर्दल प्रत्याशी के रूप में शुरू हुआ। हालांकि इस चुनाव में उन्हें चौथे स्थान पर रहकर पराजय का सामना करना पड़ा था। पर, बसपा प्रत्याशी से अधिक वोट मिलने के कारण उत्साह से लबरेज गिरीश ने 93 में भी निर्दल उम्मीदवार के रूप में किस्मत आजमाया। राम मंदिर लहर के कारण इस चुनाव में भी उन्हें भाजपा के शिवदानी से शिकस्त खानी पड़ी थी। 1995-96 में गिरीश पहली बार नेवादा क्षेत्र के ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुए। बढ़ते सियासी कद को देखते हुए बसपा ने साल 2009 के लोकसभा चुनाव में गिरीश को नवसृजित कौशाम्बी संसदीय क्षेत्र का उम्मीदवार बनाया। चुनाव में वह 1,90,712 वोट हासिल कर दूसरे पायदन पर रहे। इस चुनाव में सपा के शैलेंद्र कुमार 55,789 वोट से विजयी हुए थे। 2012 में गिरीश अपने प्रभाव के दम पर सामान्य सीट से पत्नी शिखा सरोज को नेवादा का ब्लॉक प्रमुख बनवाने में कामयाब हुए। इससे पहले 2007 में गिरीश खुद ब्लॉक प्रमुख रहे। क्षेत्रीय बिरादरी के बीच गिरीश की अच्छी पकड़ को देखते हुए हाल ही में पार्टी का दामन पकड़ने के बावजूद कांग्रेस ने शनिवार को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। इसी के साथ विपक्षियों खासतौर से सपा-बसपा गठबंधन में खलबली मच गई है।
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टिकट के लिए 11 लोगों ने किया था आवेदन
मंझनपुर। कांग्रेस पार्टी से कौशाम्बी संसदीय सीट पर चुनाव के लिए जिले के 11 नेताओं ने आवेदन कर रखा था। इनमें पूर्व मंत्री मतेश चंद्र सोनकर, बीना रानी, पूर्व विधायक रामसजीवन निर्मल, महेंद्र गौतम, राजदेव गौतम, रवि प्रकाश रावेंद्र, रामखेलावन सरोज, कन्हैयालाल सोनकर, रामप्रकाश सरोज तथा गिरीश पासी आदि नेता शामिल रहे। उधर, उम्मीदवार चयन में पुरनियों को दरकिनार कर हाल ही में कांग्रेस के साथ आए गिरीश को मौका मिलने से अंदरखाने विरोधी स्वर भी उठ रहे हैं।
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