प्रदेश के डिप्टी सीएम व लोक निर्माण मंत्री केशव प्रसाद मौर्य अपने गृह जनपद में ही बेगाने हो गए। डिप्टी सीएम ने जिस सड़क (शरीफाबाद से शीतला धाम) निर्माण के लिए अपने विभाग को पत्र लिखा वह विभाग ने सिरे से खारिज कर दिया। आनन-फानन में सांसद, विधायक ने अपनी-अपनी निधि से 30-30 लाख रुपये की मंजूरी दी। पर, तकनीकी दिक्कतोें के कारण टेंडर नहीं हो पा रहा है।
प्रदेश के डिप्टी सीएम के पास लोक निर्माण विभाग का भी मंत्रालय है। पिछले दिनों जब वह गृह जनपद आए थे तो स्थानीय लोगों ने सिराथू विधान सभा के शरीफाबाद से शीतला धाम तक जाने वाली सड़क की बदहाली के बारे में बताया और सड़क निर्माण कराने की मांग की। डिप्टी सीएम ने मामले में संजीदगी दिखाते हुए सड़क बनाने के लिए बाकायदा अपने लेटर पैड पर लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिया। इस पर विभाग ने सड़क निर्माण के लिए इस्टीमेट बनाकर भेजा। बताते हैं कि मुख्यालय ने इस्टीमेट को खारिज कर दिया। इसे लेकर भाजपा और डिप्टी सीएम की किरकरी होने लगी। बाद में आनन-फानन सांसद विनोद सोनकर और सिराथू विधायक शीतला प्रसाद पटेल ने अपनी निधि से 30-30 लाख रुपये की मंजूरी दी। अधिशाषी अभियंता पीडब्ल्यूडी सतीश कुमार ने बताया कि सड़क सरकारी अभिलेख में आरईएस की है। इसके चलते मामला फंस गया है।
सड़क आरईएस की है। सांसद और मैंने अपनी निधि से 30-30 लाख रुपये दिए हैं। निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका है। डिप्टी सीएम ने सड़क निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखा था। पर, तकनीकी कारणों से मंजूरी नहीं मिल सकी।
शीतला प्रसाद-विधायक, सिराथू
शरीफाबाद-शीतला धाम की सड़क निर्माण के लिए डिप्टी सीएम के निर्देश पर इस्टीमेट बनाकर मुख्यालय भेजा गया था। पर, आरईएस की सड़क होने के कारण मुख्यालय ने प्रस्ताव खारिज कर दिया है। अब सड़क हस्तांतरण की विभागीय कार्रवाई कर दोबारा इस्टीमेट भेजा जाएगा।
सतीश कुमार-एसईएन, पीडब्ल्यूडी