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कमीशन के फेर में दोआबा की बिजली का बंटाधार

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मंझनपुर/ बारा। कमीशन के फेर में बिजली का दिवाला निकला जा रहा है। जिले में जो भी नए पोल लगाए जा रहे हैं वह तेज हवा का झोंका बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। इसकी हकीकत पिछले दिनों आए आंधी-तूफान में खुलकर सामने आ गई। तूफान में करीब दो हजार बिजली के खंभे टूट गए थे। विभाग पोल टूटने के पीछे तकनीकी खामी मान रहा है।
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जिले में पंडित दीन दयाल उपाध्याय विद्युतीकरण योजना के तहत 1310 गांवों को रोशन किया जा रहा है। इन गांवों में विद्युतीकरण का काम कराया जा चुका है। 24 मई को जिले में आंधी के दौरान करीब दो हजार पोल टूट गए। जिसमें एक हजार पोल पंडित दीन दयाल योजना के तहत लगाए थे। बिजली विभाग के पुराने पोल महज आठ सौ टूटे हैं।
बिजली विभाग के आंकड़ों के मुताबिक तूफान में 80 लाख का नुकसान हुआ है। विभाग को इसे सहीं करने में पसीना आ रहा है। तमाम प्रयास के बावजूद अभी तक सैकड़ों मजरों में नए पोल नहीं लगाए जा सके। पोल टूटने के पीछे विभाग में भारी-भरकम कमीशन की चर्चा है। विभागीय सूत्रों की मानें तो पोल यूपीपीसीएल (उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन) से सप्लाई किया जाता है। पुराने पोल में चार एमएम के 20 से 25 स्टील वायर होते हैं। इसके अलावा एक हिस्सा सीमेंट में डेढ़ हिस्सा बालू व तीन हिस्सा गिट्टी मिलाया जाता है। इसके विपरीत जिले में जो पोल सप्लाई किए गए हैं वह मानक पर खरे नहीं उतर रहे हैं।
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पोल की गुणवत्ता जांचने का जिम्मा भारत सरकार की संस्था इरडा के पास होता है। जिले से मामले की जानकारी दिए जाने के बाद संस्था की तरफ से पोल की गुणवत्ता जांचने के लिए कोई नहीं आया। दूसरी तरफ पोल टूटने के बाबत बिजली विभाग के अफसरों का अलग तर्क है। अधीक्षण अभियंता तारिक जलील का कहना है कि पहले सीमेंट का पोल कच्ची जमीन में गाड़ा जाता था। गड्डा भी मजदूर खोदा करते थे। इससे आंधी में पोल तिरक्षा तो होता था लेकिन टूटने से बच जाता था। अब पोल सीमेंट के फाउंडेशन पर गाड़ा जाता है। इससे पोल हिल नहीं सकता। जिसकी वजह से तेज हवा में पोल टूट जाते हैं।

बिजली कर्मी कर रहे चोरी
बारा। कौशांबी इलाके में करारी-बिजिया मार्ग पर तमाम पोल टूट गए हैं। इसमें लगे इंस्सुलेटर, क्रॉस, आरम आदि प्राइवेट बिजली कर्मी खोल ले गए। यही समान नलकूप संचालकों को बेचा जाता है। जिसकी वजह से विभाग का काफी नुकसान हुआ है।
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