मंझनपुर। बरसात में जल संचय व पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रधानमंत्री की तरफ से एक चिट्ठी सभी ग्राम प्रधानों को लिखी गई है। पंचायतीराज विभाग ने इस चिट्ठी को ग्राम पंचायत सचिवों के जरिए गांवों में भेजा है। अब ग्राम प्रधान बैठक बुलाकर इस चिट्ठी को सबको पढ़कर सुनाएंगे और उसके अनुरूप कार्ययोजना भी तैयार करेंगे।
प्रधानमंत्री के हस्ताक्षर से जारी इस चिट्ठी में लिखा है कि प्रिय सरपंच जी नमस्कार.. नए भारत का निर्माण आप सबके सक्रिय सहयोग और सहभाग से ही संभव है। वर्षा ऋतु का आगमन होने वाला है। हम भाग्यशाली है कि ईश्वर ने देश को पर्याप्त जल प्रदान किया है। ईश्वर की इस भेंट का आदर करना हमारा कर्तव्य है। अपने इस पत्र में प्रधानमंत्री ने अपेक्षा जाहिर की है कि ग्राम पंचायतें खेत का पानी खेत में और नदियों का पानी नदियों में रोकने के लिए डैम बनाएं, जलाशय बनाएं और अन्य जलस्रोतों की सफाई भी करें। प्रधानमंत्री ने प्रधानों से यह भी अपेक्षा की है कि वह ग्राम सभा की खुली बैठक बुलाकर इस पत्र को पढ़ें और लोग इस पर विचार विमर्श करें। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया है कि जल की हर बूंद के संचयन के लिए प्रयास करेंगे। उन्होंने लोगों को स्वच्छता अभियान को व्यापक रूप देने के लिए बधाई देते हुए लिखा है कि जैसे स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाया वैसे ही जल संचयन को भी जन आंदोलन का स्वरूप देंगे। डीपीआरओ गोपालजी ओझा ने बताया कि सभी ग्राम प्रधानों को पत्र की प्रति भेजी जा रही है। प्रधानों को ग्राम सभा में खुली बैठक कराकर पत्र की भावना के अनुरूप कार्य करने का निर्देश दिया गया है।