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महाहड़ताल: दोआबा के 80 फीसदी परिषदीय स्कूलों में ताला बंद

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मंझनपुर/अजुहा/म्योहर। शिक्षकों की हड़ताल के बाद अब शिक्षामित्रों के अनिश्चतकालीन धरने की वजह से दिक्कतें बढ़ गई हैं। शासन-प्रशासन की घुड़की के बावजूद शिक्षकों दूसरे दिन भी महाहड़ताल जारी रही। इसका सर्वाधिक असर परिषदीय स्कूलों के पठन-पाठन पर पड़ रहा है। वृहस्पतिवार को जिले के 80 फीसदी स्कूलों में तालाबंदी रही। शिक्षामित्रों के भरोसे यदा-कदा खुले स्कूलों में बच्चे मौज करते नजर आए। इसके विपरीत शिक्षा विभाग के अफसर अधिकतर स्कूलों के खुले होने का दावा कर रहे हैं।
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पुरानी पेंशन बहाली को लेकर राज्य कर्मचारी छह से 12 फरवरी तक के लिए महाहड़ताल पर चले गए हैं। आंदोलन में जिले के परिषदीय स्कूलों में कार्यरत 3770 पुराने शिक्षक भी शामिल हैं। हालांकि पहले ही दिन बीएसए अरविंद कुमार ने नो वर्क नो पे की चेतावनी दे दिया था। पर, दूसरे दिन गुरुवार को अफसर की चेतावनी बेअसर दिखी। अब महज चार सौ की संख्या में तैनात नए शिक्षक और शिक्षामित्रों का ही सहारा बचा था। पर, गुरुवार से ही राजधानी दिल्ली में शुरू हुए धरने की वजह से यहां तैनात 1242 में से अधिकतर शिक्षामित्र भी स्कूल नहीं पहुंचे। इसके चलते गुरुवार को जिले के 80 फीसदी स्कूलों में तालाबंदी रही। अमर उजाला टीम ने अलग-अलग क्षेत्रों में जायाजा लिया तो कुछ ऐसा ही देखने को मिला। कौशाम्बी ब्लॉक के फदिलाबाद, गौहानी, सचवारा,अर्काफतेहपुर, एकौरा, बथुई, रानीपुर, पड़रिया शुकुवारा, सहित सभी विद्यालयों में लगातार दूसरे दिन ताला बंदी रही। सिराथू क्षेत्र के पूमावि. हौल्ीपुर ताला बंद मिला तो प्राथमिक विद्यालय परसीपुर में मौजूद शिक्षामित्र बच्चों को एक कमरे में बैठाकर स्कूल खोलने की महज औपचारिकता निभाते दिखे। कड़ा के धुमाई, बरीपुर आदि में ताला तलटकता मिला।

सिर्फ113 शिक्षक हड़ताल पर, सभी स्कूल खुलने का दावा
दूसरी तरफ बीएसए अरविंद कुमार ने दावा किया कि जिले भर के महज 113 शिक्षक ही हड़ताल पर है। महाहड़ताल का जिले में खास असर नहीं है। गुरुवार को उन्होंने सदर ब्लॉक के आधा दर्जन स्कूलों का निरीक्षण किया। जिसमें सभी स्कूल खुले मिले हैं।
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