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मौसम की बेरुखी ने बढ़ाई गेहूं किसानों की चिंता

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मौसम ने बढ़ाई गेहूं किसानों की चिंता
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दिन में चटख धूप व पछुआ हवाओं से घट रही खेतों की नमी
दो-चार दिन तक मौसम ऐसे ही रहा तो गेहूं का उत्पादन घटना तय
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। मौसम की बेरुखी ने दोआबा के किसानों की चिंता बढ़ा दी हैं। दिन में चटख धूप और पिछले तीन दिन से चल रही पछुआ हवाओं के कारण खेतों की नमी घट रही है। कृषि वैज्ञानिकाें का मानना है कि दो-चार दिन ऐसे ही मौसम बना रहा तो गेहूं उत्पादन पर असर पड़ना तय है।
कौशाम्बी की जीविका का मुख्य साधन खेती है। यहां इस बार 87,987 हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी की खेती की जा रही है। इसमें अकेले 74,143 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की बुआई की गई है। बेहतर उत्पादन के लिए किसानों ने प्रमाणित बीज से लेकर उर्वरक तक सबकुछ किसानों ने लगा रखा है। इसके बाद भी मौसम का मिजाज किसानों की चिंता का कारण बना हुआ है। तीन दिन से चल रही पछुआ हवाएं और दिन में चटख धूप खिल रही है। जनवरी के पहला पखवाड़ा बीतने के करीब है। पर, अभी भी अधिकतम तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्यिस बना हुआ है। हालांकि रात को पारा छह डिग्री के आसपास रहता है। इस वजह से स्थिति कुछ संभली है। पछुआ हवा और दिन की धूप के कारण खेतों की नमी गायब हो रही है। किसानों को चिंता है कि अगर जनवरी में भी सर्दी न हुई तो फरवरी में मौसम गर्म होना शुरू हो जाएगा। ऐसे में गेहूं की फसल का नुकसान होना तय है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अजय सिंह का कहना है कि ऐसे ही मौसम बना रहा तो गेहूं के पौधों का विकास थम जाएगा और इसका असर उत्पादन पर पड़ेगा।
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अधिकतम 18 डिग्री तक रहना चाहिए तापमान
गेहूं की फसल के लिए न्यूनतम तापमान तो अनुकूल है। पर, अधिकतम तापमान कुछ ज्यादा है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ अजय सिंह का कहना है कि दिन का अधिकतम तापमान 18 रहने पर खेतों में नमी बनी रहती है। इससे गेहूं के पौधों का बेहतर विकास होता है। और पैदावार भी अच्छी होती है।
फोटो नं-8
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