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पुराने में खप रही नए शौचालयों की रकम

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पुराने शौचालयों का रंगरोगन कराकर बताया जा रहा नया
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पुराने में खप रही नए शौचालयों की रकम
ओडीएफ अभियान को चपत लगा रहे प्रधान व सेक्रेटरी
कमीशन के चक्कर में धड़ाधड़ काटे जा रहे चेक
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
जिले के ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी ओडीएफ अभियान को चपत लगाने में जुटे हैं। गांवों में बने पुराने शौचालयों के गृहस्वामियों को नाम चेक काटकर कमीशन की वसूली की जा रही है। यह खेल जिले की लगभग 55 फीसदी ग्राम सभाओं में चल रहा है। धनराशि आवंटन करने के बाद पुराने शौचालयों का रंगरोगन कराकर उन्हें नया बताया जा रहा है।
जिले की ग्राम सभाओं में शत प्रतिशत शौचालयों का निर्माण कराते हुए 31 दिसंबर तक पूर्ण रूप से ओडीएफ बनाया जाना है। केंद्र सरकार के इस अभियान को अंजाम तक पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार ने भी समय-सीमा निर्धारित कर दिया है। ऐसे में अधिकारी जिले को एक दिसंबर तक शौचालय से शत प्रतिशत संतृप्त करने के लिए अभियान चला रखा है। अभियान के तहत गांवों में शौचालयों के निर्माण की गति तेज की जा रही है। शासन के निर्देश पर प्रशासन के बढ़ते दबाव को देख ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी ग्रामीणों के घर बने पुराने शौचालयों को देखकर चेक काट रहे हैं। चेक मिलने के बाद प्रधान व सेक्रेटरी अपना कमीशन लेकर पुराने शौचालयों का रंगरोगन करा देते हैं। बानगी के तौर पर विकास खंड कौशांबी के मेड़रहा गांव को लिया जा सकता है। यहां के ग्राम पंचायत सदस्य शिव अभिलाष के घर पुराना शौचालय बना था। प्रधान ने कमीशनखोरी के चक्कर में दबाव बनाकर सेक्रेटरी से सदस्य की मां कुशमा देवी, आनंद कुमार के नाम चेक कटवा दिया। मामले की शिकायत अवधेश कुमार, शिव अभिलाष, सुरेश चंद्र, बिट्टन देवी आदि ग्राम पंचायत सदस्यों ने डीपीआरओ से की। जांच करने गए जिला समन्वयक ने रिपोर्ट में इसकी पुष्टि भी करते हुए कई पुराने शौचालयों के नाम नया चेक काटे जाने की रिपोर्ट डीपीआरओ को दी है। यह हाल जिले भर की कई ग्राम सभाओं का है। जिम्मेदार हैं कि ओडीएफ अभियान के दौरान पुराने शौचालयों का रंगरोगन देख कुछ समझ नहीं पा रहे हैं। प्रधान व सेक्रेट्रियों की कमीशनखोरी के चक्कर में शौंचालयों का प्रतिशत नहीं बढ़ पा रहा है।
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इनसेट
पहले 15 सौ, अब है 12 हजार शौचालय की रकम
जिले में शौचालय निर्माण की योजना लगभग दस साल से चल रही है। दस साल में चार बार शौचालय की रकम बढ़ चुकी है। पहले इसकी धनराशि 15 सौ रुपए थी। बाद में इसे बढ़ाकर साढ़े चार हजार रुपए किया गया। वर्ष 2014 में हजारों लोगों को शौचालय का लाभ दिया गया। वर्ष 2014 के बाद से ग्रामसभाओं में शौचालय निर्माण की धनराशि 12 हजार रुपए कर दी गई।
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क्या कहते हैं अधिकारी
‘ओडीएफ अभियान के दौरान स्थलीय सत्यापन में ऐसी शिकायतें मिल रही हैं। कुछ जगहों पर इसकी पुष्टि भी हुई है। मामले में संबंधित से जवाब तलब किया गया है। जवाब मिलने के बाद धनराशि की रिकवरी कराई जाएगी।’
कमल किशोर, डीपीआरओ
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