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14 कारोबारियों को सिर्फ 89 लाख का ही मिला ऋण

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14 कारोबारियों को सिर्फ 89 लाख का ही मिला ऋण
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बैंकों की अनदेखी और स्थानीय स्तर पर बाजार नहीं मिलने से रफ्तार नहीं पकड़ रही योजना
आम बजट में एक जिला एक उत्पाद को बढ़ावा देने की पहल से जगी उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। वन डिस्ट्रिक, वन प्रोडक्ट योजना दोआबा में रफ्तार नहीं पकड़ रही है। इसके पीछे बैंकों की अनदेखी और स्थानीय स्तर पर बाजार नहीं मिलने को जिम्मेदार माना जा रहा है। उद्योग विभाग की कवायद के बावजूद चालू सत्र में सिर्फ 14 छोटे कारोबारियों को करीब 89 लाख रुपये का ही ऋण मुहैया कराया जा सका है। हालांकि इस बार के आम बजट में सरकार ने ओडीओपी को बढ़ावा देने से यहां के कारोबारियों में उम्मीदें जगी हैं।
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केंद्र सरकार ने पहले कार्यकाल के दौरान वर्ष 2018-19 में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक जिला, एक उत्पाद योजना संचालित किया था। योजना के तहत कौशाम्बी जिले में पैदा होने वाले केले का चयन किया गया था। तय हुआ कि जिले में तकरीबन छह हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में केले की खेती की जाती है। इतने बड़े पैमाने पर उत्पादन के बावजूद विपणन की मुकम्मल व्यवस्था नहीं होने से किसानों को उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। ओडीओपी योजना लागू होने से यहां के किसानों, व्यापारियों को उम्मीदें जगी थी कि परिस्थितियां बदलेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। योजना के तहत शासन ने केले से तैयार होने वाले उत्पाद मसलन चिप्स, नमकीन, अचार आदि के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए 30 कारोबारियों को बैंक ऋण मुहैया कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। कम से कम तीन करोड़ का ऋण स्वीकृत कर कारोबारियों को 75 लाख रुपये सब्सिडी मुहैया कराने का निर्देश है। पर, चालू वित्तीय वर्ष के दस महीने गुजरने के बावजूद अभी तक सिर्फ 14 कारोबारियों को ही केवल 89 लाख रुपये का ऋण मुहैया कराया जा सका है। महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र दिनेश चंद्र शास्त्री ने बताया कि 36 लोगों के आवेदन स्वीकृत कर दिए गए हैं। जल्द ही ऋण मुहैया करा दिया जाएगा। जबकि हकीकत में बैंकों के जिम्मेदार नए उद्यमियों को ऋण देने में कंजूसी बरत रहे हैं। ऐसे में योजना को लेकर तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं। शनिवार को केंद्र सरकार द्वारा आम बजट में एक जिला एक उत्पाद को बढ़ावा देने की पहल से लोगों को उम्मीद जगी है कि शायद बैंक अपना रवैया बदलें।
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