अभियान में भी नहीं बन दुरुस्त हो सकी प्रमुख सड़कें
गड्ढामुक्त व नवीनीकरण के नाम पर करोड़ों खर्च फिर भी समस्या जस की तस
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। डिप्टी सीएम एवं प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री केशव मौर्या के गृह जनपद में सड़कों की गड्ढा मुक्ति व नवीनीकरण के नाम पर खेल किया जा रहा है। अभियान चलाकर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद जिले की कई प्रमुख सड़कें अब भी बदहाल हैं। इसके विपरीत विभागीय अफसर आंकड़ों में जिले की 97 फीसदी सड़कें लकदक करने का दावा कर रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने अभियान चलाकर सड़कें गड्ढामुक्त करने का फरमान जारी किया है। लोक निर्माण विभाग का दावा है कि चालू वित्तीय वर्ष में जिले की 242 सड़कें गड्डामुक्त की गई हैं। जबकि 302 सड़कों का नवीनीकरण किया गया है। इन कार्यो पर सरकारी खजाने का करीब 34 करोड़ खर्च किया जा चुका है। जबकि हकीकत कुछ और है। विभाग जिन सड़कों को गड्ढामुक्त किए जाने का दावा कर रहा है। वह अगले दिन ही फिर से पुराने ढर्रे पर हो जा रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गड्ढा मुक्ति के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है। यही हाल सड़कों के नवीनीकरण का है। नवीनीकरण के नाम पर एक लेयर गिट्टी डालकर डामर का लेपन किए जाने का विभागीय दावा है। जबकि जमीनी हकीकत अलग है। ग्रामीणों की मानें तो सड़क की सफाई किए बगैर कार्यदायी संस्था के ठेकेदार मानक और गुणवत्ता के साथ खेल कर रहे हैं।
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खटाई में पड़ा अजुहा-टांडा मार्ग का निर्माण
अजुहा। सिराथू ब्लॉक के अजुहा से अलीपुर जीता वाया टांडा मार्ग की लंबाई 16 किमी है। इस सड़क पर यूपी बोर्ड के 75 फीसदी टॉपर देने वाले धर्मा देवी इंटर कॉलेज केन, जय मां दुर्गे इंटर कॉलेज अमिरतापुर समेत आधा दर्जन स्कूल कॉलेज हैं। साथ ही तीन दर्जन से अधिक गांव बसे हैं। प्रमुख मंडी अजुहा आवागमन के लिए यह मुख्य मार्ग है। वर्ष 1988 में इसका निर्माण श्ुारू कराया गया तो केन गांव के एक काश्तकार ने अड़ंगा लगा दिया। मामला कोर्ट पहुंचा तो अदालत ने कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग को काउंटर लगाने का आदेश दिया। पर, विभाग ने काउंटर लगाने के बजाय सौ मीटर छोड़कर बाकी हिस्से की सड़क बना दी। उसके बाद से सड़क कई मर्तबा बनी और ध्वस्त हुई। पर, विवाद नहीं हल हुआ। इधर बीच सड़क चौड़ीकरण शुरू हुआ। नौ महीने पहले ही 90 फीसदी निर्माण कार्य पूरा होने के बाद फिर केन गांव के पास काम रुक गया। टांडा के सूर्यभान भाष्कर ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के पोर्टल पर, केन गांव के ग्राम प्रधान रामेश्वर प्रसाद व रामसुभग त्रिपाठी का आरोप है कि विभागीय जिम्मेदारों के दिलस्पी नहीं लेने से निर्माण कार्य अटका है। -----------
सियासत का शिकार हुआ म्योहर-सरायअकिल मार्ग
म्योहर। सिराथू-प्रयागराज मार्ग के मध्य म्योहर से सरायअकिल को जोड़ने वाली सड़क पूरी तरह से अस्तित्व खो चुकी है। मंझनपुर और चायल विधानसभा के बीच पड़ने की वजह से सड़क सियासत का शिकार हो गई है। इस मार्ग से क्षेत्र के दर्जनों के गांव के ग्रामीण प्रमुख कस्बा सरायअकिल की बाजार करते हैं। रोजाना हजारों की संख्या में स्कूली बच्चों का आवागमन होता है। सड़क पर बने गड्ढों में फंसकर छात्र और राहगीर हादसे का शिकार हो रहे हैं। इसी वजह से विभागीय अफसरों, जनप्रतिनिधियों ने इसे बिसरा दिया है। यही हाल करारी-प्रयागराज मार्ग का है। इस सड़क में बैरागीपुर के पास बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं।
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तालाब में तब्दील चरवा-मनौरी मार्ग, बढ़ी परेशानी
चरवा। चायल क्षेत्र के चरवा-मनौरी मुख्य मार्ग सालों से बदहाल है। टिकई तारा मीरन होते हुए टाटा चौराडीह को जोड़ने वाले इस मार्ग पर एक दर्जन से ज्यादा गांव पड़ते है। सड़क पिछले कई साल से तालाब में तब्दील हो गई है। करीब एक किमी तक सड़क पर बड़े-बडे़ गड्ढे हो गए हैं। गांव के रवी पांडेय, अमर पांडेय लालमन पाल, फकीरे लाल, ओमप्रकाश पाल, वीरेंद्र पाल आदि का कहना है कि क्षेत्रीय विधायक से भी शिकायत की गई। पर, समस्या का समाधान नहीं हुआ। जबकि इस मार्ग पर दिनभर आवागमन की व्यस्तता बनी रहती है। लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं। सर्वाधिक परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है।
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इनका कहना है
चालू वित्तीय वर्ष में जिले की 97 प्रतिशत सड़कों का गड्ढामुक्त व नवीनीकरण किया जा चुका है। अभियान से छूटी सड़कों के लिए भी प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। जल्द ही जिले की सभी सड़कें दुरुस्त करा दी जाएंगी।
सतीश कुमार-एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी
फोटो नं-1,2,3 अभियान में भी नहीं बन दुरुस्त हो सकी प्रमुख सड़कें