मंझनपुर। केंद्र सरकार की कौशल विकास मिशन का जिले के युवाओं को खास फायदा नहीं मिल रहा है। वित्तीय वर्ष के आठ महीने गुजरने के बावजूद यहां के महज 52 युवाओं को ही रोजगार मुहैया कराया जा सका है। योजना की इस रफ्तार से शासन की ओर से निर्धारित लक्ष्य हासिल कर पाना मुश्किल दिख रहा है।
केद्र की मोदी और प्रदेश की योगी सरकार शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों को रोजगार के अवसर मुहैया कराने के लिए कौशल विकास मिशन के रूप में एक प्लेटफार्म मुहैया कराया है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में मिशन के नौ केंद्रों के संचालन का दावा किया जा रहा है। इन केंद्रों पर आठवीं पास से लेकर ऊपर की कक्षाओं तक के युवक-युवतियों को विभिन्न क्षेत्रों मसलन इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रानिक्स, ब्यूटीशियन, सिलाई, गारमेंट्स, सिक्योरिटी, आईटीसी आदि का प्रशिक्षण कराने की व्यवस्था है।
प्रशिक्षण के बाद इनकी परीक्षा कराकर कंपनियों में नौकरी दिलाने का निर्देश है। इस साल सरकार ने जिले के 1427 युवक-युवतियों को प्रशिक्षित कराने का लक्ष्य निर्धारित कर रखा है। विभागीय आंकड़ों पर ही यकीन करें तो अब तक 1158 बेरोजगारों का विभिन्न ट्रेड के लिए नामांकन किया चुका है। इनमें से 910 तो अलग-अलग केंद्रों पर प्रशिक्षण ले रहे हैं। जबकि अब तक सिर्फ 52 युवक-युवतियों को ही रोजगार मुहैया कराया जा सका है। अब सवाल उठता है कि जब वित्तीय वर्ष के आठ महीने में केवल 52 को नौकरी दिलाई जा सकी तो बाकी बचे चार महीने में लक्ष्य कैसे पूरा होगा। हालांकि जिला एमआईएस प्रबंधक अमित कुमार का दावा है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
हर ट्रेड के लिए प्रशिक्षण की है अलग व्यवस्था
कौशल विकास मिशन के तहत जिले में कुछ चुनिंदा ट्रेड के ही प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। इनमें इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रानिक्स, ब्यूटीशियन, सिलाई, गारमेंट्स, सिक्योरिटी, आईटीसी आदि ट्रेड शामिल हैं। जिला प्रबंधक एमआईएस का कहना है कि सभी के प्रशिक्षण का अलग-अलग समय निर्धारित है। तीन से आठ महीने तक के प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षुओं की परीक्षा कराई जाती है। परीक्षा में सफल होने पर कम से कम 60 फीसदी युवाओं को सेवायोजित कराने का प्रावधान है।
कागजों में दिलाई जा रही नौकरी
कौशल विकास मिशन के तहत प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार मुहैया कराने में भी खेल किया जा रहा है। पिछले दिनों आईटीआई सिराथू में लगे रोजगार मेले में ऐसा ही कुछ देखने को मिला था। मेले में मिशन के तहत प्रशिक्षति युवाओं को भी बुलाया गया था। चार कंपनियों ने साक्षात्कार के बाद 208 युवाओं का चयन किया। चयनित युवाओं को ज्वाइंनिंग लेटर भी भेजा गया। पर, सूत्रों की मानें तो कंपनियों की शर्तें पसंद नहीं होने की वजह से अधिकतरों ने ज्वाइन ही नहीं किया। दूसरी तरफ मिशन ने मेले में चयनितों का आंकड़ा दर्ज कर अपना कोरम पूरा कर लिया।