मंझनपुर। खेतों से गुजरे बिजली के तार ढीले हो गए हैं। हवा से तार आपस में टकरा जाते हैं। इससे चिंगारी कभी भी फसलों को राख कर सकती है। लोगों ने विभाग से समस्या सके समाधान की मांग की है।
दोआबा के गांवों में बिजली पहुंचाने के लिए दशकों पहले विद्युत लाइन खींची गई थी। अब इनके तार ढीले और जर्जर हो चुके हैं। इन्हें यदि लाइनमैन कसने की कोशिश करते हैं तो उसी समय टूटकर गिर जाते हैं। परिणामस्वरूप तारों को ढीला ही छोड़ दिया जाता है। मौजूदा समय में खेतों में गेहूं पकने की कगार पर है। जल्द ही इन्हें काटा जाएगा, लेकिन फसल के ऊपर से गुजरे ढीले व जर्जर विद्युत तार हवा से आपस में टकराने लगते हैं। इससे या तो वह टूटकर गिर जाते हैं या चिंगारी निकलती है। इससे कभी भी हादसा हो सकता है। ऐसी घटनाएं जिले में हर साल होती हैं। बानगी के तौर पर सरायअकिल उपकेंद्र से जुड़े खरसेन का पूरा गांव को लिया जा सकता है। यहां के रामचंद्र सिंह व छेदीलाल सेन के खेत में खड़ी गेहूं की एक बीघा फसल पिछले साल विद्युत चिंगारी की भेंट चढ़ गई थी। गनीमत रही कि निजी नलकूप होने की वजह से अन्य खेतों की फसलों को आग की भेंट चढ़ने से बचा लिया गया था। इसी तरह कनैली, जुगराजपुर, म्योहर, इच्छना आदि गांवों में पिछले साल कई बीघा गेहूं की फसल आग की भेंट चढ़ गई थी। इसी तरह इच्छना गांव निवासी भूप नारायण, हंसराज व अल्प नारायण की खेत में खड़ी गेहूं की फसल आग की भेंट चढ़ गई थी।
किसानों का लगभग ढाई से तीन सौ बीघा गेहूं आग की भेंट चढ़ गया था। अधिकारी किसानों को मुआवजे का आश्वासन देते हुए तार ठीक कराने की बात करते हैं। लेकिन घटना के बाद भूल जाते हैं। विद्युत विभाग में बिजनेस प्लान की पत्रावली को देख लिया जाय तो सालभर में 108 स्थानों के 70 किलोमीटर लंबी लाइन के जर्जर विद्युत तार बदलने के लिए चेयरमैन को प्रस्ताव भेजा गया था। साल बीतने को है और एक भी स्थान के जर्जर विद्युत तार विभाग नहीं बदलवा सका है।
वहीं एस्सईएन प्रदीप कुमार सोनकर का कहना है कि मैंने हाल ही में जिले का कार्यभार संभाला है। पिछले साल की घटनाओं की जानकारी नहीं है। मामले में क्षेत्रीय एसडीओ से वार्ता की जाएगी। जहां भी समस्याएं हैं उन्हें दूर कराया जाएगा।