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1283 शिक्षामित्रों पर टूटा पहाड़, फूट-फूट कर रोए

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर फफक पड़े शिक्षामित्र
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परिवार के सदस्यों का भी बुराहाल, 1283 शिक्षामित्रों पर टूटा पहाड़
सुप्रीमकोर्ट के फैसले ने उड़ाए होश
परिवार के सदस्यों का भी बुरा हाल
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
सुप्रीमकोर्ट का फैसला आते ही समायोजित शिक्षकों पर पहाड़ टूट पड़ा है। उनके सारे सपने चकनाचूर होते दिख रहे हैं। 1283 शिक्षकों पर फैसले की मार पड़ी है। दो साल में टीईटी के विकल्प को वे लालीपॉप बता रहे हैं। शिक्षक बनने के बाद इनकी जीवन शैली बदल गई थी। फैसले को लेकर शिक्षामित्र अभी भी दिग्भ्रमित हैं। प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों से बातचीत न होने के कारण उनमें असमंजस की स्थिति है।
जिले के स्कूलों में 1447 शिक्षामित्र तैनात हैं। सपा सरकार ने इन शिक्षामित्रों में से 1283 को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किया था। 164 शिक्षामित्र समायोजन का इंतजार कर रहे थे। समायोजन के लिए शिक्षामित्रों ने अपने मूल पद से इस्तीफा भी दे दिया था। मंगलवार को सुप्रीमकोर्ट ने समायोजन के मसले पर अपना फैसला सुनाया। समायोजित शिक्षकों को दो साल के भीतर टीईटी की परीक्षा पास करने का विकल्प दिया गया है। दोपहर बाद फैसला आया तो शिक्षामित्रों के होश उड़ गए। सुप्रीमकोर्ट का स्पष्ट आदेश क्या है, यह जानने के लिए एक दूसरे को फोन लगाना शुरू किया। एक घंटे के भीतर सभी शिक्षामित्र बौखला गए। शिक्षामित्रों के बीच अभी यह स्पष्ट नहीं है कि समायोजन रद्द हुआ है कि नहीं। यदि समायोजन रद्द नहीं हुआ है तो दो साल के भीतर यदि वे टीईटी नहीं निकाल पाते हैं तो इसके बाद उनका क्या होगा। शिक्षामित्र पद से इस्तीफा दे ही चुके हैं। ऐसे में यदि टीईटी के विकल्प से भी वे चूक गए तब तो उनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष रत्नाकर सिंह भी ऊहापोह की स्थिति को दूर नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने बताया कि प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों से भी बातचीत नहीं हो पा रही है, लेकिन जो सूचनाएं मिल रही हैं, उससे अब यही लग रहा है कि अब उनके पास बहुत चांस नहीं बचा है। जिला मुख्यालय में देर शाम एक दर्जन से अधिक शिक्षामित्र इकट्ठा हुए। वह एक दूसरे से गले लगकर रोए और यही सवाल करते रहे कि अब वह क्या करेंगे और कहां जाएंगे। अब तो उनके पास रोजगार का दूसरा कोई साधन भी नहीं है।
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टीवी से चिपकी रही निगाहें
फैसले का इंतजार शिक्षामित्रों को बेसब्री से था। दोपहर करीब दो बजे जैसे ही फैसला आया शिक्षामित्रों की नींद उड़ गई। उन्हें इस फैसले की उम्मीद नहीं थी, इसलिए उनकी आंखों के अंधेरा छाने लगा था। आनन-फानन हकीकत जानने के लिए एक दूसरे को फोन लगाना शुरू किया। सोशल मीडिया पर भी हकीकत जानने की कोशिशें देर शाम तक होती रहीं।
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