फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीबीआई ने कब्जे में ली खनन विभाग की फाइलें

विज्ञापन
विज्ञापन
सीबीआई नेकब्जे में ली खनन विभाग की फाइलें
विज्ञापन

वर्ष 2012 से 2016 तक का अभिलेख साथ ले गई टीम
पट्टाधारक व भंडारण के सभी अभिलेखों की बारीकी से जांच शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने डेरा डालते ही शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मंगलवार को खनन कार्यालय में सीबीआई पहुंची और जांच के लिए जरूरी सभी अभिलेखों को अपने कब्जे में ले लिया। खनन अधिकारी से एक दर्जन से अधिक बालू पट्टाधारकों के नाम, पता व मोबाइल नंबर भी लिए गए हैं। इसके बाद कैंप कार्यालय बुलाकर कई लोगों से पूछताछ भी की गई।
सीबीआई ने अवैध बालू खनन मामले की तफ्तीश तेज कर दी है। मंगलवार को करीब 12 बजे सीबीआई खनन कार्यालय पहुंची। जांच अधिकारी सुरेश चंद्र ने खनन अधिकारी राजरंजन से पूछताछ की इसके बाद वर्ष 2012 से वर्ष 2016 तक के पट्टाधारकों के मूल अभिलेख लिए। इनमें भंडारण करने वाले के भी अभिलेख शामिल हैं। लगभग दो दर्जन से ज्यादा फाइलों को कब्जे में लिया गया है। इसके बाद एक दर्जन से अधिक बालू घाटों के पट्टाधारकों का नाम, पता व मोबाइल नंबर लिया गया। कार्यालय के कर्मचारियों से यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि किसको कब पट्टा दिया गया? कब-कब उसने बालू का खनन किया। किसके आदेश पर पट्टाधारकों को भूखंड आवंटित किया गया था। पट्टा की अवधि खत्म होने पर बाधित समय का लाभ किस प्राविधान के तहत दिया गया। इसकी एक-एक जानकारी जुटाने के बाद सीबीआई फाइल लेकर कांशीराम गेस्ट हाउस में स्थित अपने कैंप कार्यालय पहुंची। दोपहर बाद सीबीआई ने तीन लोगों से पूछताछ की। इनसे बालू खनन के संबंध में सवाल-जवाब किया गया।
विज्ञापन



बाधित अवधि का लाभ देने में फंस सकते हैं पूर्व अधिकारी
मंझनपुर। पट्टाधारकों पर मेहरबानी करने वाले अफसर भी सीबीआई के निशाने पर हैं। तत्कालीन अधिकारियों ने शासन की आंख में धूल झोंककर कई पट्टाधारकों को बाधित अवधि का लाभ दिया था। अधिकारियाें ने यह कार्रवाई नियम-कानून से परे बताई है। अब जांच में यही मामला फंसा है। कई पूर्व अधिकारियों की सूची भी बन चुकी है। इनमें प्रभारी खनन अधिकारी भी शामिल हैं। खनन विभाग में तैनात रहे कर्मचारियों से भी पूछताछ हो सकती है।

किसी भी पट्टाधारक के पास नहीं थी एनओसी
वर्ष 2012 से हुए बालू खनन की जांच के दौरान सबसे बड़ा चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि उस वक्त के पट्टाधारकों ने एनओसी नहीं प्राप्त की थी। आवेदन करते ही उन्होंने अधिकारियों से साठगांठ करके बालू का खनन शुरू करा दिया था। यही कारण है कि सीबीआई ने एनओसी लेने वालों की सूची मांगी है। साथ ही शासन से मिली एनओसी का पूरा ब्यौरा मांगा है। एनओसी का यह पेंच भी पट्टाधारकों के गले की फांस बन सकता है।


सिंडीकेट के शरणदाता से की गई पूछताछ
सपा सरकार में सिंडीकेट को जिला मुख्यालय में शरण देने वाले सुशील कुमार उर्फ गोलू केशरवानी से मंगलवार को सीबीआई ने कैंप कार्यालय बुलाकर पूछताछ की। सीबीआई ने सिंडीकेट के सदस्यों की बाबत जानकारी ली है। बालू खनन में सिंडीकेट की क्या भूमिका थी, वह यहां तक कैसे आए? उनसे क्या संबंध थे? इन्हीं सब बिंदुओं पर सवाल-जवाब किए गए हैं। सिंडीकेट को सुशील कुमार उर्फ गोलू ने अपना मकान किराए पर रहने के लिए दिया था। यही कारण है कि वह भी जांच के दायरे में शामिल हैं।
विज्ञापन



फोन उठाने से डर रहे बालू माफिया
सीबीआई के आते ही बालू माफिया को अपने मोबाइल फोन से डर लगने लगा है। वे फोन पर बातचीत करने से कतराने लगे हैं। कई लोग ऐसे हैं जो अब अपना मोबाइल ही नहीं उठा रहे हैं। कारोबारियों के बीच अफवाह फैला दी गई है कि उनके फोन सर्विलांस पर हैं। जैसे ही बात उन तक पहुंची उनके होश उड़ गए। बालू की चर्चा करते ही वे कांप जाते हैं और कॉल काट देते हैं। जिला मुख्यालय में मंगलवार को आए बालू कारोबारियों की यही स्थिति रही।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें