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27 हजार हेक्टेयर में लहलहाएगी मोटे अनाजों की फसल

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27 हजार हेक्टेयर में लहलहाएगी मोटे अनाजों की फसल
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असिंचित क्षेत्र में बढ़ी अरहर, ज्वार व बाजरा की खेती
मौसम मुफीद होते ही किसानों ने खेतों में शुरू की बुवाई
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
जिले के किसानों में मोटे अनाज के प्रति रुझान देखते हुए कृषि विभाग ने लक्ष्य बढ़ा दिया है। इस साल जिले भर के असिंचित क्षेत्रफल में लगभग 27 हजार हेक्टेयर भूमि पर अरहर, ज्वार, बाजरा सहित कई फसलों की खेती लहलहाएगी। बड़े पैमाने पर मोटे अनाजों की खेती कराने के लिए कृषि विभाग ने मोटे अनाजों की बीज उपलब्धता जून माह में ही सुनिश्चित करा लिया था। बारिश शुरू होने पर जैसे ही मौसम मुफीद हुआ किसानों ने खेतों में बुवाई शुरू कर दिया है।
खरीफ की प्रमुख फसल धान के अलावा इस बार कृषि विभाग दलहन, तिलहन के अलावा मोटे अनाज ज्वार, बाजरा की खेती को बढ़ावा दे रहा है। इसके लिए कृषि विभाग ने अलग-अलग फसलों का लक्ष्य निर्धारित करते हुए जून माह में ही बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करा दिया है। कृषि विभाग के आंकड़ों पर जाएं तो मोटे अनाजों में मक्का, ज्वार, बाजरा, उर्द, मूंग, अरहर तिल, मूंगफली को प्रमुखता से शामिल किया है। इस खेती में किसान भी असिंचित क्षेत्र के खेतों में बुवाई करने में रुचि दिखा रहा है। बीजों की आसानी से उपलब्धता होने के चलते किसानों ने खेतों में अरहर, ज्वार, मूंग, उर्द, तिल, आदि की बुवाई भी शुरू कर दिया है। कृषि विभाग का मानना है कि मौसम मुफीद होने पर धान की तुलना में मोटे अनाज से किसानों को कम लागत में अधिक फायदा होना तय है। किसान भी इस बात को बखूबी समझ रहे हैं।
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इनसेट
अरहर, तिल, मूंग व उर्द की मिलती है अच्छी कीमत
खरीफ की खेती में पैदा होने वाले मोटे अनाज से किसानों को अच्छा मुनाफा होता है। किसानों की माने तो अरहर से प्रति बीघा 15 से 20 हजार की आय होती है तो तिल, मूंग और उर्द से भी किसानों को दस से 15 हजार का मुनाफ महज दो हजार रुपए खर्च करने में मिल जाता है। खास बात यह है कि इन फसलों की परवरिश करने के लिए किसानों को मशक्कत नहीं करनी पड़ती। बारिश के पानी से ही यह फसलें तैयार हो जाती है।

पेड़ों के भी मिलते हैं अच्छे दाम
खरीफ की खेती अरहर और बाजरे से किसानों को दोहरा फायदा होता है। किसान दाने को तो खरे भाव बेंच ही लेता है उसके पेड़ों की भी अच्छी कीमत मिलती है। अरहर की लकड़ी कच्चे घरों व छप्पर बनाने के साथ-साथ चूल्हा जलाने के काम आती है। इसके चलते किसान 20 से 25 रुपए पेड़ों के बोझ को 30 से 40 रुपए में बेच लेता है। यही हाल बाजरे के पेड़ों का है। पशुओं के चारे के रूप में प्रयोग होने वाले बाजरे के पेड़ भी 50 से 60 रुपए बोझ बिक जाते हैं। कुल मिलाकर मोटे अनाज की खेती से किसानों को आम के आम और गुटलियों के भी दाम मिलते हैं।
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किस फसल का कितना है लक्ष्य
फसल का नाम लक्ष्य हेक्टेयर में
मक्का 86 हेक्टेयर
ज्वार 7128 हेक्टेयर
बाजरा 9775 हेक्टेयर
उर्द 894 हेक्टेयर
मूंग 45 हेक्टेयर
अरहर 8014 हेक्टेयर
तिल 1045 हेक्टेयर
मूंगफली 30 हेक्टेयर
अन्य मोटा अनाज 04 हेक्टेयर

क्या कहते हैं अधिकारी
मोटे अनाज की मांग एक बार फिर बढ़ रही है। इसे देखते हुए कृषि विभाग ने असिंचित एरिया में लक्ष्य को 22 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर 27 हजार कर दिया है। इस साल मौसम अच्छा रहने की संभावना है। इससे मोटे अनाजों की पैदावार भी अच्छी होगी।
एसएस चौहान, उप कृषि निदेशक
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