बेसिक शिक्षा की अलख जगाने को सोमवार को स्कूल तो खुले पर समस्याएं पूर्व की भांति बरकरार हैं। स्कूलों के शौचालय ध्वस्त मिले तो हैंडपंपों का बोर भर्स्ट रहा। कई स्कूलों के शिक्षक गायब रहे तो कहीं-कहीं मौजूद शिक्षकों ने शिक्षण कार्य नहीं किया। डीएम और बीएसए के फरमान के बाद शिक्षण सत्र की शुरआत सोमवार को अव्यवस्थाओं के बीच हुई।
नए शिक्षण सत्र की बेहतर शुरुआत के लिए डीएम मनीष कुमार वर्मा और बीएसए दल श्रृंगार यादव ने मातहतों को कड़े निर्देश दे रखे थे। समय से स्कूल पहुंचने, शिक्षण कार्य में लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की हिदायत भी दी गई थी। बावजूद इसके मनमानी के आदी हो चुके शिक्षकों में सुधार देखने को नहीं मिल रहा। इसके अलावा स्कूलों की व्यवस्था भी पटरी से उतरी नजर आ रही हैं।
बानगी के तौर पर विकास खंड नेवादा के प्राथमिक विद्यालय पूरे घासीराम मजरा बसुहार को लिया जा सकता है। इस विद्यालय की चहारदीवारी ध्वस्त है तो स्कूल जाने वाले रास्ते में खाद के गड्ढों की वजह से गंदगी फैली हुई है। इसके चलते बच्चों को खेत से होकर स्कूल पहुंचना पड़ता है। स्कूल का शौचालय पूरी तरह से ध्वस्त है।
स्कूल में रजिस्टर्ड 78 बच्चों में 20 मौजूद मिले जिन्हें रोटी-सब्जी और फल के मेन्यू की जगह खिचड़ी बनवाई जा रही थी। प्राथमिक विद्यालय चिरारी की प्रधानाध्यापिका स्कूल से गायब रहीं तो दो सहायिकाएं कक्ष में बैठकर दरबार कर रहीं थी। इस स्कूल की भी चहारदीवारी व शौचालय ध्वस्त है। विकास खंड सिराथू के प्राथमिक विद्यालय गड़रियन का पुरवा मजरा कोर्रो का ताला सोमवार को खुला पर बच्चों की उपस्थिति नगण्य रही।
विद्यालय का हैंडपम्प भी साल भर से खराब है और चहारदीवारी का निर्माण कार्य स्थानीय लोगों के विरोध के चलते अधर में लटका है। मंझनपुर ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय समदा का हाल बेहाल रहा। यहां पर तैनात शिक्षक गायब रहे तो बच्चे कक्षा में बैठकर खेल रहे थे। शिक्षकों के बावत पूछा गया तो पता चला कि वह बच्चों को उनके घर बुलाने गए हैं। बहरहाल नए शिक्षण सत्र की शुरूआत सोमवार को अव्यवस्थाओं के बीच हुई। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिक्षा की नींव कही जाने वाली बेसिक शिक्षा का स्तर जिले में क्या है।